'सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से वकीलों और कोर्ट स्टाफ को आने-जाने की अनुमति मिले': SCBA अध्यक्ष विकास सिंह की CJI से मांग

Praveen Mishra

23 July 2026 12:51 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से वकीलों और कोर्ट स्टाफ को आने-जाने की अनुमति मिले: SCBA अध्यक्ष विकास सिंह की CJI से मांग

    छात्र संगठनों के जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने का मुद्दा गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में उठा।

    सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से आग्रह किया कि कम से कम सुप्रीम कोर्ट के वकीलों, वादकारियों और कोर्ट स्टाफ को उचित सुरक्षा जांच के बाद मेट्रो स्टेशन का उपयोग करने की अनुमति दी जाए।

    चीफ़ जस्टिव के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए विकास सिंह ने कहा कि जिन लोगों के पास सुप्रीम कोर्ट का वैध प्रवेश पास (Proximity Card) है और रजिस्ट्री के कर्मचारी हैं, उन्हें स्टेशन के एग्जिट प्वाइंट पर सुरक्षा जांच के बाद बाहर निकलने की अनुमति दी जा सकती है।

    उन्होंने सुझाव दिया कि अन्य यात्रियों को अगले स्टेशन तक जाने के लिए कहा जा सकता है।

    इस पर CJI सूर्यकांत ने बताया कि उन्होंने सुबह ही सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को इस संबंध में दिल्ली मेट्रो अधिकारियों से बातचीत करने के लिए कहा है।

    उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि दोपहर तक कोई समाधान नहीं निकलता है, तो वह स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे।

    CJI ने कहा कि विकास सिंह द्वारा सुझाया गया समाधान भी विचाराधीन विकल्पों में शामिल है। इस पर विकास सिंह ने कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं निकलता है, तो इस मुद्दे पर न्यायिक पक्ष से विचार किया जाना चाहिए।

    चीफ जस्टिस ने यह भी बताया कि उन्होंने एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि वकीलों की अनुपस्थिति के कारण किसी भी मामले में प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किए जाएं।

    गौरतलब है कि दिल्ली मेट्रो ने गुरुवार सुबह घोषणा की थी कि छात्र प्रदर्शनों के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन सहित कुल 16 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखा जाएगा।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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