महिला एडवोकेट पर पति के बर्बर हमले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया
Praveen Mishra
27 April 2026 12:39 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महिला अधिवक्ता पर हुए कथित बर्बर हमले के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की और उन आरोपों की जांच के निर्देश दिए, जिनमें कहा गया है कि तीन अस्पतालों ने उन्हें आपातकालीन उपचार देने से इनकार कर दिया।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। यह मामला एडवोकेट स्नेहा कलिता द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर दर्ज किया गया, जिसमें कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली उनकी सहयोगी पर हुए हमले का जिक्र किया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि महिला एडवोकेट पर उनके पति ने कई बार चाकू से हमला किया, जिससे उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तीन अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन कथित रूप से उनकी गंभीर स्थिति का हवाला देकर भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। बाद में सुबह करीब 6 बजे उन्हें All India Institute of Medical Sciences (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान - एम्स) में भर्ती कराया गया।
दिल्ली सरकार की ओर से एडिसनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपी पति को 25-26 अप्रैल की रात गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़िता का एम्स में इलाज किया गया और बाद में उन्हें एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां उनकी हालत अब स्थिर है।
अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार के आरोपों पर चिंता जताते हुए अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह इन परिस्थितियों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि पीड़िता की तीन बेटियां हैं—जिनकी उम्र 12 वर्ष, 4 वर्ष और 1 वर्ष है। आरोप है कि हमले के बाद ससुराल पक्ष दो नाबालिग बच्चों को अपने साथ ले गया, जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है, जबकि बड़ी बेटी को आरोपी पति ने रात में घर के बाहर छोड़ दिया था, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद किया।
खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस के आयुक्त को निर्देश दिया कि जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी, अधिमानतः महिला अधिकारी (एसीपी या डीसीपी स्तर) को सौंपी जाए। साथ ही, पुलिस को लापता दोनों बच्चों का पता लगाने और बड़ी बेटी की कस्टडी उसके ननिहाल के पास बनाए रखने का निर्देश दिया गया।
पीड़िता की चिकित्सा और बच्चों की देखभाल के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता को देखते हुए अदालत ने National Legal Services Authority (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) को निर्देश दिया कि वह अगले दिन तक अंतरिम आर्थिक सहायता राशि जारी करे। सुनवाई के अंत में मुख्य न्यायाधीश ने पीड़िता के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

