'सिर्फ़ रेड सिग्नल काफ़ी नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट रोड क्रॉसिंग के पास स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने का सुझाव दिया

Shahadat

15 Sept 2026 5:31 PM IST

  • सिर्फ़ रेड सिग्नल काफ़ी नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट रोड क्रॉसिंग के पास स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने का सुझाव दिया

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से दिल्ली हाईकोर्ट क्रॉसिंग के पास स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने पर फ़ैसला लेने को कहा; यह क्रॉसिंग नेशनल ज़ूलॉजिकल गार्डन के पास भी है।

    बता दें, पिछले साल जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सड़क सुरक्षा सुधारों पर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एस. राजशेखरन द्वारा 2013 में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के पास पैदल यात्रियों के लिए क्रॉसिंग न होने पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने सुरक्षा में एक गंभीर कमी की ओर इशारा किया था, जिससे उन लोगों की जान को खतरा हो सकता है, जो हर दिन बिना ट्रैफ़िक सिग्नल, फ़ुट ओवरब्रिज या सुरक्षा के अन्य उपायों के इस व्यस्त रास्ते को पार करते हैं।

    सीनियर एडवोकेट और एमिक्स क्यूरी गौरव अग्रवाल ने मंगलवार को बताया कि केंद्र सरकार ने अब उस क्रॉसिंग पर रेड लाइट सिग्नल लगा दिया है। उन्होंने कहा कि वहाँ पैदल यात्रियों के लिए कोई क्रॉसिंग नहीं थी, इसलिए हाईकोर्ट के कई कर्मचारी सड़क के बाईं ओर उतरकर दाईं ओर जाने के लिए सड़क पार करते थे। उन्होंने बताया कि पुराना किला होने के कारण उस तरफ़ कोई निर्माण संभव नहीं है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि यह काफ़ी नहीं है और सुझाव दिया कि स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाए जाएं। उन्होंने आगे प्रस्ताव दिया कि केंद्र को वाहनों की आवाजाही और ट्रैफ़िक की जांच करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनानी चाहिए ताकि यह देखा जा सके कि क्या सुधारात्मक उपाय अपनाए जाने चाहिए।

    उन्होंने कहा,

    "मेरा सुझाव है कि MORTH [सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय] को वाहनों की आवाजाही और पैदल यात्रियों के ट्रैफ़िक प्रवाह की जाँच करने दें।"

    एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रम बनर्जी ने जवाब दिया कि रेड सिग्नल लगाना ही काफ़ी है, लेकिन अगर कोर्ट कुछ और चाहती है, तो केंद्र सरकार वह भी करेगी।

    इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा:

    "यह लोगों की जान का मामला है। हम दोनों वहां जाएंगे। आप हमारे साथ चलें। सब लोग वहाँ जाएँगे। क्या आप ऐसा करना चाहते हैं? यह जनहित का मामला है।"

    जब ASG ने कहा कि हमने बेहतर समाधान खोजने की कोशिश की तो जस्टिस पारदीवाला ने कहा:

    "भारत में समाधान बहुत, बहुत बेहतर होने चाहिए।"

    अक्टूबर 2025 में दिए गए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कई निर्देश जारी किए। इनमें देश भर में ऐसे स्थानों की पहचान करने के लिए सर्वे करने का निर्देश शामिल है, जहां पैदल यात्रियों के लिए अतिरिक्त क्रॉसिंग की ज़रूरत है। आदेश में दिल्ली हाई कोर्ट क्रॉसिंग का भी ज़िक्र किया गया।

    कोर्ट ने कहा था,

    "मथुरा रोड पर दिल्ली हाईकोर्ट और नेशनल ज़ूलॉजिकल गार्डन के पास बनी रोड क्रॉसिंग का उदाहरण लिया जा सकता है। यहां हर दिन हज़ारों कर्मचारी, मुक़दमेबाज़, वकील, बच्चे और परिवार बिना किसी रेड लाइट, फ़ुट ओवरब्रिज या ट्रैफ़िक को धीमा करने वाले किसी उपाय के सड़क पार करते हैं, जिससे उनकी जान को ख़तरा होता है।"

    कोर्ट ने निर्देश दिया कि मथुरा रोड पर दिल्ली हाई कोर्ट और नेशनल ज़ूलॉजिकल गार्डन के पास वाली रोड क्रॉसिंग को प्राथमिकता दी जाए।

    मंगलवार को कोर्ट ने कुछ अंतरिम अर्जियों (Interlocutory Applications) का भी निपटारा किया, जो वाहन ट्रैकिंग डिवाइस और नेशनल रोड सेफ्टी बोर्ड के गठन से जुड़ी थीं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह सुनवाई की अगली तारीख तक यह बताए कि क्या बोर्ड अब पूरी तरह से काम करने लगा है।

    Case Details: S.RAJASEEKARAN v UNION OF INDIA AND ORS. AND ORS.|W.P.(C) No. 295/2012

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