सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण न हटाने पर BMC आयुक्त का वेतन रोका; 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

  • सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण न हटाने पर BMC आयुक्त का वेतन रोका; 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के नगर आयुक्त को अवमानना ​​का नोटिस जारी किया। यह नोटिस 13 नवंबर 2025 और 28 जुलाई 2026 को दिए गए उन निर्देशों का जानबूझकर पालन न करने के लिए दिया गया, जिनमें मुंबई के बोरीवली में 'बेस्ट' (BEST) बस स्टैंड के लिए तय की गई जमीन से अतिक्रमण हटाने को कहा गया।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने BMC की अर्जी खारिज की, जिसमें उसने अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ बेदखली का आदेश जारी करने के लिए और समय मांगा था। साथ ही कोर्ट ने नगर निगम पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने नगर निगम और महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हो जाता, तब तक आयुक्त का वेतन जारी न किया जाए।

    कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

    "प्रथम दृष्टया हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि बृहन्मुंबई नगर निगम के आयुक्त अदालत की अवमानना ​​के दोषी हैं। उन्होंने 13 नवंबर 2025 और 28 जुलाई 2026 को दिए गए हमारे समयबद्ध निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन किया और उनका पालन नहीं किया। उन्हें कारण बताना होगा कि उनके खिलाफ उचित कार्रवाई क्यों न की जाए। इस बीच नगर निगम और राज्य सरकार को निर्देश दिया जाता है कि वे आयुक्त या उनके निजी स्टाफ को कोई मासिक वेतन जारी न करें। इस अर्जी को 5 लाख रुपये के जुर्माने के साथ खारिज किया जाता है।"

    कोर्ट ने BMC के रवैये की कड़ी आलोचना की और बार-बार सवाल उठाया कि उनके अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने में दिलचस्पी क्यों नहीं ले रहे हैं।

    CJI ने संकेत दिया कि नगर निगम अतिक्रमण करने वालों के साथ मिलीभगत कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों को जेल भेज दिया जाएगा।

    आदेश लिखवाने के बाद CJI ने टिप्पणी की,

    "ये लोग शालीन भाषा नहीं समझते, इसलिए इन्हें इस आदेश की भाषा समझनी होगी। हम उन्हें जेल भेज देंगे, तब उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भाषा समझ आ जाएगी।"

    जब BMC की ओर से सीनियर एडवोकेट आरपी भट्ट ने अदालत से बार-बार यह अनुरोध किया कि वे उनके इस बयान को रिकॉर्ड कर लें कि नगर निकाय 30 दिनों के भीतर अदालत के आदेश का पालन करेगा, तो CJI ने तंज कसते हुए कहा कि अगर BMC निर्देशों का पालन करती है, तो अदालत उसे 'प्रशंसा प्रमाण पत्र' (Appreciation Certificate) देगी।

    CJI ने कहा,

    "अगर वे हमारे आदेश का पालन करते हैं तो हम बहुत आभारी होंगे। हम उन्हें प्रशंसा प्रमाण पत्र देंगे! पहले वे ऐसा करके तो दिखाएं। इस अदालत द्वारा जारी निर्देशों का पूरी तरह से जानबूझकर और शरारतपूर्ण तरीके से उल्लंघन किया गया। और ऐसा लगता है कि यह उन अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत से हो रहा है, जिन्हें ये नगर निकाय अधिकारी संरक्षण दे रहे हैं। क्या आप चाहते हैं कि हम आज ही यह बात लिख दें, या एक हफ्ते बाद लिखें जब हम जुर्माने की रकम 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर देंगे... हम अभी कुछ भी रिकॉर्ड नहीं कर रहे हैं। हम पहले ही निर्देश जारी कर चुके हैं। निर्देश एक निश्चित समय-सीमा के साथ दिए गए। वह समय-सीमा पहले ही बीत चुकी है।"

    28 जुलाई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया कि वह तीन महीने के भीतर काम पूरा करे और अतिक्रमण हटाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि 'महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम, 1966' (Maharashtra Regional and Town Planning Act, 1966) के तहत अतिक्रमणकारियों को जारी किए गए नोटिसों को लेकर सिविल कोर्ट में चल रही कार्यवाही, अनधिकृत कब्जाधारियों को हटाने में बाधा नहीं बनेगी, क्योंकि सिविल कोर्ट ने कोई अंतरिम रोक (interim stay) नहीं लगाई।

    Case Title : M/s Parag Construction (now Dube Constructions) v. Sandhya Nandedkar

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