दिल्ली दंगा मामला: इलेक्ट्रॉनिक सबूतों तक आरोपियों की पहुंच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

Shahadat

20 July 2026 1:31 PM IST

  • दिल्ली दंगा मामला: इलेक्ट्रॉनिक सबूतों तक आरोपियों की पहुंच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में आरोपी देवांगना कलिता को उन इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को देखने की इजाज़त दी गई थी, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने जांच के दौरान इकट्ठा तो किया था, लेकिन अभियोजन पक्ष ने उन पर भरोसा नहीं किया।

    बता दें, 6 जून को दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कलिता की याचिका खारिज की थी, जिसमें उन्होंने CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के वीडियो और उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा इस्तेमाल की गई व्हाट्सएप चैट की मांग की, क्योंकि उनमें संवेदनशील जानकारी शामिल थी। हालांकि, जज ने उन्हें पुलिस की कस्टडी में रखे गए उन दस्तावेज़ों को देखने की इजाज़त दी थी, जिनका इस्तेमाल नहीं किया गया।

    दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी थी।

    जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि कोर्ट के दो फैसलों - देबेंद्र नाथ पाधी और सरला गुप्ता - में साफ तौर पर कहा गया कि आरोपी चार्ज तय होने के चरण में उन दस्तावेज़ों को देखने का हकदार नहीं है, जिनका इस्तेमाल नहीं किया गया। राजू ने कहा कि इस चरण में ऐसे दस्तावेज़ों को देखने की मांग करना सिर्फ़ ट्रायल में देरी करने की एक चाल है।

    कलिता के वकील ने कहा कि वे एक ऐसे वीडियो तक पहुंच चाहते थे, जिससे पता चले कि वह शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रही थीं। उन्होंने कहा कि अगर इस बात का साफ सबूत है कि उन्होंने पत्थर नहीं फेंके तो उन्हें बरी कर दिया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा:

    "मैं उन वीडियो की कॉपी चाहता था जिनसे पता चले कि हम शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे। जिन भी जजों ने वे वीडियो देखे हैं, उन्होंने कहा कि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी हैं। अगर वीडियो में दिख रहा है कि मैं विरोध कर रही हूं, और उन्होंने मुझे यह नहीं बताया कि कहां तो मेरे पत्थर फेंकने की बात कैसे आ सकती है? अगर मैं शांति से बैठी हूं तो मुझे बरी कर दिया जाना चाहिए; मुझे ट्रायल से क्यों गुजरना चाहिए?"

    हालांकि, जस्टिस कुमार ने कहा कि यह ट्रायल के चरण में बचाव का आधार हो सकता है, लेकिन इससे पहले इन दलीलों पर विचार नहीं किया जा सकता।

    दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद जस्टिस कुमार ने कहा:

    "आप इसके हकदार नहीं हैं; सरला गुप्ता मामले के फैसले में यही कहा गया। विवादित आदेश पर रोक रहेगी। आप गुलफिशा मामले का फैसला देखिए; आप तो अगले 10 साल में भी अपनी दलीलें पूरी नहीं कर पाएंगे और फिर आप कहते हैं कि ट्रायल में देरी हो रही है।"

    दिल्ली हाईकोर्ट ने जून 2021 में कलिता को उनके साथ आरोपी आसिफ़ इक़बाल तन्हा और नताशा नरवाल के साथ ज़मानत दी थी। मई 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की चुनौती को खारिज करते हुए इस आदेश को बरकरार रखा। अगस्त 2023 में, ट्रायल कोर्ट ने UAPA मामले में कलिता को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली इलाके का पूरा CCTV फ़ुटेज और पुलिस अधिकारियों के ग्रुप की WhatsApp चैट देने से इनकार कर दिया।

    Case Details: STATE NCT OF DELHI Vs DEVANGANA KALITA|SLP(Crl) No. 12447/2026 Diary No. 38990 / 2026

    Next Story