सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका निस्तारित की, रिहाई का लिया संज्ञान

Praveen Mishra

23 March 2026 4:02 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका निस्तारित की, रिहाई का लिया संज्ञान

    सुप्रीम कोर्ट ने आज लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका का निस्तारण कर दिया। यह याचिका उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो द्वारा दाखिल की गई थी।

    जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार ने 14 मार्च को हिरासत आदेश को वापस ले लिया है, जिसके चलते यह याचिका अब निष्प्रभावी (infructuous) हो गई है और इस पर निर्णय देने के लिए कुछ शेष नहीं है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने मामले को अवकाश के बाद सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। हालांकि, पीठ ने पूछा कि अब इस मामले में निर्णय के लिए क्या बचा है। सिब्बल ने हिरासत आदेश के गुण-दोष (merits) पर सुनवाई की मांग की, लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अब इस पर आगे बढ़ने की आवश्यकता नहीं है।

    इसके बाद पीठ ने याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए निस्तारित कर दिया।

    केंद्र सरकार ने यह कहते हुए हिरासत रद्द की थी कि वांगचुक एनएसए के तहत अधिकतम अवधि के लगभग आधे समय तक हिरासत में रह चुके हैं।

    याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया था कि हिरासत के आधार बने सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। विशेष रूप से, जिन भाषणों को प्रशासन ने भड़काऊ बताया था, उनके वीडियो उपलब्ध कराने को लेकर विवाद था। प्रशासन का दावा था कि वीडियो पेनड्राइव में दिए गए थे, जबकि कोर्ट ने पूछा कि क्या वांगचुक को वास्तव में उन्हें देखने का अवसर मिला।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि प्रशासन वांगचुक के भाषणों की “अत्यधिक व्याख्या” कर रहा है। साथ ही, भाषणों के अनुवाद में भी कुछ विसंगतियों पर पीठ ने चिंता जताई थी।

    अंततः, केंद्र द्वारा हिरासत आदेश वापस लिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को समाप्त कर दिया।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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