'राज्य सरकारें नाकाम': सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में रेत माफिया के आतंक पर राजस्थान और मध्य प्रदेश को फटकारा

Shahadat

14 April 2026 10:09 AM IST

  • राज्य सरकारें नाकाम: सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में रेत माफिया के आतंक पर राजस्थान और मध्य प्रदेश को फटकारा

    सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में 'रेत खनन माफिया' द्वारा पुल के पास की गई अवैध खुदाई को लेकर राजस्थान और मध्य प्रदेश राज्यों को कड़ी फटकार लगाई।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच नेशनल चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और घड़ियालों सहित लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर खुद से संज्ञान (suo motu) लिए गए मामले की सुनवाई कर रही थी।

    सुनवाई के दौरान, बेंच ने हाल ही में आई उस रिपोर्ट का ज़िक्र किया, जिसमें बताया गया कि एक वन रक्षक को एक ट्रैक्टर ने कुचल दिया था; आरोप है कि उस ट्रैक्टर में अवैध रूप से खोदी गई रेत भरी थी।

    मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि इस घटना पर एक उच्च-अधिकारी रिपोर्ट पेश कर सकते हैं।

    ASG ने आगे बताया कि पुल के पास की गई खुदाई के संबंध में एक 'तथ्य-खोज समिति' (Fact-Finding Committee) का गठन किया गया।

    इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए जस्टिस मेहता ने कहा,

    "क्या वे पुल के गिर जाने के बाद रिपोर्ट देंगे? क्या लोगों के मरने के बाद रिपोर्ट आएगी?"

    ASG ने जवाब दिया कि रिपोर्ट 1 हफ़्ते के भीतर सौंप दी जाएगी।

    जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की कि आखिर राज्य सरकार ने शुरू में ही खुदाई की इजाज़त क्यों दी?

    "राज्य सरकार ने इसकी इजाज़त क्यों दी? क्या राज्य के अधिकारी अंधे हो गए?"

    जस्टिस मेहता ने इस बात पर ज़ोर दिया कि किस तरह माफिया राज्य के अधिकारियों को निशाना बना रहा है।

    "तस्वीरें खुद-ब-खुद सब कुछ बयां कर रही हैं, मिस्टर राजू; यह सब आपकी नाक के नीचे हो रहा है। एमिक्स क्यूरी (कोर्ट के सलाहकार) ने भी यह बात उठाई कि आपके अधिकारियों के पास हथियार नहीं हैं। आखिर राज्य सरकार किसलिए मौजूद है?"

    उन्होंने आगे कहा,

    "ये खुदाई करने वाली मशीनें और बुलडोज़र... ये बहुत सेक्युलर हैं, ये उस इंसान की जाति नहीं देखते जिसे ये मार रहे हैं... यह बहुत ही दुखद स्थिति है, राज्य सरकारें पूरी तरह से फेल हो गईं या यूं कहें कि वे मिलीभगत में शामिल हैं... यह बिल्कुल चौंकाने वाली बात है कि एक पुल की नींव खोदी जा सकती है और राज्य सरकारें बस आंखें मूंदे बैठी हैं।"

    इस मामले में एमिक्स क्यूरी (अदालत के सलाहकार) सीनियर एडवोकेट निखिल गोयल ने बताया कि चंबल अभयारण्य में राजस्थान और मध्य प्रदेश, दो राज्यों को जोड़ने वाले पुल में 34 खंभे हैं, जिनमें से 8 खंभों के पास से रेत खोद ली गई।

    उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि खंभों के नीचे से 25-50 फीट तक रेत निकाली गई। इससे होने वाली तबाही के बारे में लोगों को आगाह करते हुए गोयल ने कहा कि औसतन रोज़ाना 5,000 लोग इस पुल से गुज़रते हैं।

    बेंच ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। केस की अपडेटेड स्थिति के अनुसार, फैसला 17 अप्रैल को सुनाया जाएगा।

    इससे पहले, अदालत ने राजस्थान सरकार के उस नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत नेशनल चंबल अभयारण्य के 732 हेक्टेयर इलाके को अदालत की पहले से मंज़ूरी लिए बिना ही अभयारण्य के दायरे से बाहर कर दिया गया। बेंच ने कहा कि राज्य सरकार "ऐसा अपने आप नहीं कर सकती थी।"

    Case Title: IN RE: ILLEGAL SAND MINING IN THE NATIONAL CHAMBAL SANCTUARY AND THREAT TO ENDANGERED AQUATIC WILDLIFE Versus, SMW(C) No. 2/2026

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