सुप्रीम कोर्ट ने नॉन-गजेटेड ग्रुप B अधिकारियों के लिए नेवी भर्ती नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
Shahadat
10 July 2026 9:48 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (10 जुलाई) को 'ऑल इंडिया क्लर्क्स एसोसिएशन' की याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देती है, जिसमें रक्षा मंत्रालय (नेवी) के ग्रुप 'B' (नॉन-गजेटेड) मिनिस्ट्रियल स्टाफ पदों के लिए भर्ती नियम, 2019 को सही ठहराया गया। इन नियमों के तहत ऑफिस सुपरिटेंडेंट के पद पर प्रमोशन के लिए ज़रूरी सर्विस का समय 8 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया।
जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच के सामने याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने तर्क दिया कि 2019 के संशोधित नियमों ने मौजूदा कर्मचारियों पर बुरा असर डाला है। इन नियमों ने प्रमोशन के लिए ज़रूरी सर्विस का समय आठ साल से बढ़ाकर दस साल कर दिया, जो कथित तौर पर डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के 31 दिसंबर, 2010 के ऑफिस मेमोरेंडम का उल्लंघन है। इस मेमोरेंडम में भर्ती नियमों में बदलाव से प्रभावित होने वाले कर्मचारियों के लिए मौजूदा योग्यता शर्तों को सुरक्षित रखा गया।
यह विवाद इंडियन नेवी के सदर्न नेवल कमांड में काम कर रहे अपर डिवीज़न क्लर्क्स (UDCs) की प्रमोशन योग्यता से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता ने चार अलग-अलग UDCs के साथ मिलकर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT), एर्नाकुलम बेंच में रक्षा मंत्रालय (नेवी) के ग्रुप 'B' (नॉन-गजेटेड) मिनिस्ट्रियल स्टाफ पदों के लिए भर्ती नियम, 2019 की वैधता को चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि 2019 के भर्ती नियमों में DoPT के 31 दिसंबर, 2010 के ऑफिस मेमोरेंडम के क्लॉज़ 3.1.3 को शामिल नहीं किया गया। यह क्लॉज़ भर्ती नियमों में संशोधन से मौजूदा कर्मचारियों पर पड़ने वाले बुरे असर से बचाता है और प्रमोशन के लिए पुरानी योग्यता शर्तों को बनाए रखता है।
2000 के भर्ती नियमों के तहत UDCs आठ साल की ज़रूरी सर्विस पूरी करने के बाद असिस्टेंट के पद पर प्रमोशन के लिए योग्य हो जाते थे। हालाँकि, 2019 के नियमों में असिस्टेंट और ऑफिस सुपरिटेंडेंट के पदों को मिला दिया गया, जिसके बाद ज़रूरी सर्विस का समय बढ़ाकर दस साल कर दिया गया।
एसोसिएशन ने तर्क दिया कि जो कर्मचारी पुरानी व्यवस्था के तहत नौकरी में आए, उन्हें DoPT की पॉलिसी के अनुसार आठ साल की योग्यता शर्त का लाभ मिलना जारी रहना चाहिए। CAT ने उनकी अर्ज़ी मंज़ूर करते हुए केंद्र सरकार को 2019 के नियमों में बदलाव करने का निर्देश दिया, लेकिन हाईकोर्ट ने CAT का आदेश पलट दिया। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि एसोसिएशन सभी प्रभावित कर्मचारियों की ओर से कोई सामान्य चुनौती तब तक नहीं दे सकती, जब तक यह साबित न हो जाए कि व्यक्तिगत आवेदकों को खुद कोई नुकसान हुआ है।
CAT के आदेश की आलोचना करते हुए हाईकोर्ट ने कहा:
"आवेदक नंबर 2 से 4 की ओर से किसी सबूत के बिना एसोसिएशन की याचिका पर विचार करना और भारत सरकार को मौजूदा कर्मचारियों के लिए पात्रता मानदंड के तौर पर आठ साल की सेवा को बनाए रखने के लिए क्लॉज़ 3.1.3 को शामिल करते हुए नियमों में बदलाव का निर्देश देना, पूरी तरह से एक बेतुकी कवायद थी।"
हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट गई।
याचिकाकर्ता-एसोसिएशन के वकील की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और चार हफ़्ते के भीतर जवाब देने को कहा।
इसके अलावा, कोर्ट से इस मुद्दे पर भी सुनवाई की उम्मीद है कि क्या एसोसिएशन अपने सदस्यों की ओर से भर्ती नियमों को चुनौती दे सकती हैं (यानी उनका 'लोकस स्टैंडी' या कानूनी अधिकार क्या है), क्योंकि हाई कोर्ट ने इसी आधार पर याचिकाकर्ता की अर्ज़ी खारिज कर दी थी।
Cause Title: ALL INDIA CLERKS ASSOCIATION & ORS. VERSUS UNION OF INDIA & ORS.


