धर्म परिवर्तन के बाद कब मिल सकता है SC दर्जा? सुप्रीम कोर्ट ने तय किए सख्त मानदंड

Praveen Mishra

26 March 2026 1:22 PM IST

  • धर्म परिवर्तन के बाद कब मिल सकता है SC दर्जा? सुप्रीम कोर्ट ने तय किए सख्त मानदंड

    एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अनुसूचित जाति (SC) का व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में परिवर्तित होता है, तो वह तुरंत अनुसूचित जाति का दर्जा खो देता है।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऐसा व्यक्ति पुनः हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में वापस आता है, तो उसे SC दर्जा दोबारा पाने के लिए निम्नलिखित शर्तों को साबित करना होगा:

    यह स्पष्ट प्रमाण होना चाहिए कि व्यक्ति मूल रूप से संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के तहत अधिसूचित जाति से संबंधित था।

    यह विश्वसनीय और ठोस साक्ष्य होना चाहिए कि उसने वास्तविक रूप से अपने मूल धर्म में पुनः प्रवेश किया है, और जिस धर्म में उसने पहले परिवर्तन किया था, उसे पूरी तरह त्याग दिया है। साथ ही, उसे अपने मूल जाति के रीति-रिवाज, परंपराएं और धार्मिक प्रथाएं अपनानी होंगी।

    यह संतोषजनक प्रमाण होना चाहिए कि संबंधित समुदाय और जाति के लोग उसे स्वीकार करते हैं और उसमें उसका समावेश हो चुका है। केवल स्वयं का दावा (self-proclamation) पर्याप्त नहीं है; समुदाय द्वारा स्वीकृति आवश्यक है।

    कोर्ट ने कहा कि ये तीनों शर्तें अनिवार्य हैं और इन्हें साबित करने का पूरा दायित्व दावा करने वाले व्यक्ति पर ही होगा। यदि इनमें से किसी एक शर्त को भी साबित नहीं किया जाता है, तो दावा अस्वीकार्य हो सकता है।

    यह फैसला जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने एक पादरी द्वारा दायर याचिका में दिया। याचिकाकर्ता मूल रूप से अनुसूचित जाति से था, लेकिन बाद में उसने ईसाई धर्म अपना लिया था और फिर अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत संरक्षण की मांग की।

    कोर्ट ने उसका दावा खारिज करते हुए कहा कि ईसाई धर्म संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 में शामिल नहीं है, इसलिए धर्म परिवर्तन के साथ ही उसका SC दर्जा समाप्त हो गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश की धारा 3 के अनुसार केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के लोग ही अनुसूचित जाति के रूप में मान्य हैं।

    साथ ही, कोर्ट ने अनुसूचित जनजाति (ST) के संदर्भ में कहा कि वहां धर्म परिवर्तन निर्णायक कारक नहीं है, लेकिन यह साबित करना होगा कि व्यक्ति अब भी जनजातीय जीवनशैली अपनाए हुए है और उसे जनजातीय समुदाय द्वारा स्वीकार किया गया है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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