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"सासंदों/ विधायकों पर लंबित आपराधिक मामले लोगों के सिर पर लटके हुए हैं, केंद्र को अंतिम रूप देना चाहिए": SC ने कहा

LiveLaw News Network
6 Oct 2020 9:28 AM GMT
सासंदों/ विधायकों पर  लंबित आपराधिक मामले लोगों के सिर पर लटके हुए हैं, केंद्र को अंतिम रूप देना चाहिए: SC ने कहा
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से देश भर में सासंदों/ विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के बारे में विवरण प्रस्तुत करने को कहा।

न्यायमूर्ति रमना ने कहा,

"जो मामले लंबित हैं और लोगों के सिर पर लटके हुए हैं, आपको अंतिम रूप देना चाहिए और हमें देना चाहिए। आप कहते हैं कि हम तैयार हैं और हम शीघ्र चाहते हैं ..."

न्यायमूर्ति एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालय लंबित आपराधिक मामलों के निपटान के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं की मांग कर रहे हैं और केंद्र से इस संबंध में निर्देश लेने को कहा, विशेष रूप से फंडिंग के संदर्भ में।

पीठ ने यह भी कहा कि वह देश भर के विभिन्न उच्च न्यायालयों को विभिन्न तौर तरीकों को निर्धारित करने वाले एक अस्थायी डेटा बिंदुओं की एक प्रति की आपूर्ति करेगी ताकि विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश तदनुसार जानकारी एकत्र कर सकें।

एक और चिंता जो पीठ ने व्यक्त की, वह यह है कि कई मामलों में पुलिस समन को लागू नहीं कर रही है क्योंकि वह सांसदों/विधायकों से डरती है और यह एक गंभीर मामला है। बेंच ने केंद्र से भी इस मुद्दे पर गौर करने को कहा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुझाव दिया कि शीर्ष अदालत प्रत्येक राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश जारी कर सकती है ताकि समय पर समन सुनिश्चित किया जा सके।

वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि उनके आदेशों के अनुपालन में, विभिन्न उच्च न्यायालयों ने हलफनामे पर अपनी कार्ययोजना दायर की है, लेकिन न्यायमूर्ति रमना ने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर कोई स्पष्टता नहीं है।

एमिकस क्यूरी ने अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में शीर्ष अदालत द्वारा एक निर्देश पर कार्रवाई की थी, जिसमें पूर्व व वर्तमान सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों का तेज़ी से निपटान करने की मांग की गई है, जिसके तहत देश भर के उच्च न्यायालयों को पूर्व और वर्तमान सांसदों/ विधायकों के आपराधिक मामलों की सूची संकलित करने का निर्देश दिया गया था।

हंसारिया ने न्यायालय को सूचित किया कि दुर्भाग्य से निगरानी के बावजूद विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है जो देश में 4859 मामले हैं।

उन्होंने कहा,

"सूक्ष्म स्तर पर सख्त निगरानी की आवश्यकता है।"

न्यायमूर्ति रमना ने आगे बताया कि भले ही उन्होंने पिछली सुनवाई में न्यायालयों के भौगोलिक स्थानों पर निर्भर मामलों की निपटान दर इंगित करने को कहा था लेकिन किसी भी अदालत ने रिकॉर्ड पर ऐसी कोई जानकारी या डेटा नहीं दिया है।

इस संदर्भ में, न्यायमूर्ति रमना ने कहा कि पीठ ने एक "अस्थायी डेटा शीट" तैयार की है जिसमें उच्च न्यायालय का नाम, लंबित मामलों की संख्या, उपलब्ध विशेष अदालतों की वर्तमान संख्या, बुनियादी ढांचे की आवश्यकता आदि एक प्रारूप के भीतर है जो स्पष्टता प्रदान करता है कि वास्तव में समस्या क्या है।

केंद्र ने लंबित मामलों के बारे में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए और समय मांगा और पीठ को बताया कि विभिन्न हितधारकों से जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है।

पीठ ने मामले को अस्थायी रूप से 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया।

9 सितंबर को शीर्ष अदालत को सूचित किया गया था कि वर्तमान और पूर्व विधायक/ सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले संख्या में 4442 हैं। मौजूदा विधायकों में 2556 अभियुक्त हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया और अधिवक्ता स्नेहा कलिता की ओर से दायर रिपोर्ट में कहा था,

"सांसदों और विधायकों ( वर्तमान और पूर्व) के खिलाफ कुल 4442 मामले विभिन्न अदालतों में हैं जिनमें सांसद और विधायकों के लिए विशेष अदालतें शामिल हैं। 2556 मामलों में वर्तमान आरोपी वर्तमान सांसद/ विधायक हैं। शामिल सांसद/ विधायकों की संख्या कुल मामलों की संख्या से अधिक है क्योंकि एक मामले में एक से अधिक आरोपी हैं, और एक ही सांसद/ विधायक एक से अधिक मामलों में आरोपी है।"

यह कहा गया है कि बड़ी संख्या में मामलों में, ट्रायल कोर्ट द्वारा गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किए गए थे और कई मामलों में, उन्हें ट्रायल कोर्ट द्वारा निष्पादित किया जाना बाकी था।

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