सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट से एसीबी मामले की सुनवाई 3 दिन के लिए टालने का अनुरोध किया, सुनवाई कर रहे जज ने कहा था- उन्हें ट्रांसफर की धमकी दी गई
Avanish Pathak
12 July 2022 1:05 PM IST

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट के जज जस्टिस एचपी संदेश से अनुरोध किया कि वह कर्नाटक की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के खिलाफ जारी मामले की सुनवाई को तीन और दिनों के लिए टाल दें।
जस्टिस संदेश ने हाल के दिनों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के खिलाफ कई प्रतिकूल टिप्पणियां की हैं और निर्देश दिए हैं।
जस्टिस संदेश ने कल एक आदेश पारित किया था, जिसमें उन्होंने दर्ज किया था कि उन्हें एक सिटिंग जज ने अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसफर की धमकी दी है, अगर उन्होंने एसीबी प्रमुख के खिलाफ आदेश पारित किया तो...। हालांकि आदेश अभी तक अपलोड नहीं किया गया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अगुवाई वाली एक पीठ ने उक्त मामले के मद्देनजर ही अनुरोध किया है।
पीठ ने आदेश में कहा, है, "हम विद्वान जज से 11 जुलाई को पारित आदेश पर गौर करने के लिए सुनवाई को तीन दिन के लिए टालने का अनुरोध करते हैं। मामले को शुक्रवार को सूचीबद्ध करें।"
सीजेआई एनवी रमन्ना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हेमा कोहली की पीठ कर्नाटक के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और उसके प्रमुख सीमांत कुमार सिंह द्वारा जस्टिस संदेश द्वारा की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर विचार कर रही थी।
एसीबी प्रमुख एडीजीपी सीमांत कुमार सिंह पिछले हफ्ते तब विवाद का केंद्र बन गए थे, जब हाईकोर्ट के जस्टिस एचपी संदेश ने खुली अदालत में एक सनसनीखेज बयान दिया कि एसीबी के खिलाफ कई निर्देश पारित करने के बाद उन्हें तबादले की अप्रत्यक्ष धमकी मिली थी। कल जस्टिस संदेश ने एक लिखित आदेश में एसीबी जांच की निगरानी के लिए प्राप्त ट्रांसफर की धमकी को दर्ज किया।
उपायुक्त (शहरी) से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में एसीबी की जांच पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए, जस्टिस संदेश ने एसीबी को उसके द्वारा दायर सभी क्लोजर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देने के लिए कई आदेश पारित किए थे।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दरमियान आज कर्नाटक राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता पेश हुए, जिन्होंने कहा, सिंगल जज को कल आदेश पारित करने से बचना चाहिए था, जब सुप्रीम कोर्ट को आज विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करनी थी। एसजी ने अनुरोध किया कि मामला कार्यवाहक चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ को सौंपा जाए।
एसजी ने कहा कि भ्रष्टाचार के एक मामले में एक आरोपी की नियमित जमानत अर्जी पर विचार करते हुए निर्देश दिए गए हैं। हालांकि हाईकोर्ट के पास किसी मामले में जांच की निगरानी करने की शक्ति है, लेकिन धारा 439 सीआरपीसी के तहत जमानत क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते समय ऐसी शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
एसजी ने कहा कि उचित तरीका यह होगा कि इसे एक जनहित याचिका के रूप में पंजीकृत किया जाए और इसे जनहित याचिकाओं से निपटने वाली पीठ को हस्तांतरित किया जाए, एसजी ने प्रस्तुत किया।
यह कहते हुए कि सिंगल जज ने मामले को कल पोस्ट कर दिया है, एसजी ने अनुरोध किया कि सुनवाई कम से कम दो दिनों के लिए स्थगित कर दी जाए।
एडीजीपी सीमांत कुमार सिंह की ओर से पेश वकील ने कहा कि जज ने उनकी बात सुने बिना ही उनके खिलाफ सख्ती की। उन्होंने कहा कि अधिकारी के एसीआर को खुली अदालत में पढ़ा गया और सुनवाई का मौका दिए बिना उनके खिलाफ कई मौखिक टिप्पणियां की गईं।
वकील ने कहा, "मेरी बात सुने बिना मेरे खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। 2009 से मेरी एसीआर खुली अदालत में पढ़ी जा रही है। मुझे कल भी बोलने की अनुमति नहीं दी गई थी और मेरे पद पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।"
जस्टिस संदेश ने क्या टिप्पणी की?
जस्टिस संदेश ने मौखिक रूप से कहा था कि एडीजीपी एक शक्तिशाली व्यक्ति हैं और हाईकोर्ट के एक जज ने उन्हें ऐसे ही हस्तक्षेप के कारा एक अन्य जज का तबादला होने का उदाहरण दिया था। जस्टिस संदेश ने ये मौखिक टिप्पणी उपायुक्त, बेंगलुरु (शहरी) से संबंधित एक मामले में जांच पर असंतोष व्यक्त करने के बाद की थी। जज ने पहले एसीबी को निर्देश दिया था कि वह अपनी स्थापना के बाद से दायर सभी क्लोजर रिपोर्ट पेश करे।
सोमवार को मामले में एक अन्य घटनाक्रम में, जस्टिस संदेश ने सिटिंग जज से मिली ट्रांसफर की धमकी को एक लिखित आदेश में दर्ज किया।
जस्टिस संदेश को जब एसीबी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी के बारे में बताया तो मामले को 13 जुलाई तक के लिए स्थगित करते हुए उन्होंने आदेश में इस प्रकार कहा-
"... रिटायरमेंट के कारण, इस अदालत ने एक जुलाई 2022 को माननीय चीफ जस्टिस को विदाई देने के लिए एक रात्रिभोज का आयोजन किया था। वहां मेरे बगल में बैठे जज ने बताया कि..."उन्हें दिल्ली से एक कॉल आया था (नाम का खुलासा नहीं किया)। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने दिल्ली से फोन किया था, उन्होंने मेरे बारे में पूछताछ की। जिस पर मैंने जवाब दिया कि मैं किसी भी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं हूं। जज यहीं नहीं रुके और कहा कि एडीजीपी उत्तर भारत से हैं और ताकतवर हैं. उन्होंने ट्रांसफर का एक उदाहरण भी दिया।"
केस टाइटल: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कर्नाटक बनाम महेश पीएस | डायरी संख्या 20631/2022

