2013 रेप केस में आसाराम के बेटे नारायण साई को राहत नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने सज़ा पर रोक लगाने से किया इनकार
Shahadat
7 Aug 2026 6:36 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कfया, जिसमें खुद को भगवान बताने वाले आसाराम के बेटे नारायण साई की उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगाने से मना कर दिया गया था। यह मामला 2013 के रेप केस से जुड़ा है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने आदेश जारी कर हाईकोर्ट से कहा कि वह नारायण साई की सज़ा और दोषसिद्धि (Conviction) के खिलाफ अपील पर 3 महीने के अंदर फैसला करे।
नारायण साई की ओर से सीनियर एडवोकेट एन हरिहरन पेश हुए।
बता दें, 2013 में सूरत की दो बहनों ने पुलिस से संपर्क किया और आरोप लगाया कि नारायण साई और उनके पिता आसाराम ने उनके साथ रेप किया था। 2019 में सेशंस कोर्ट ने नारायण साई को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई।
एडिशनल सेशंस जज पीएस गढ़वी ने यह सज़ा सुनाई और नारायण साई को पीड़िता को 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने उनके तीन सहयोगियों (जिनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं) को भी अलग-अलग अपराधों का दोषी मानते हुए 10-10 साल की जेल की सज़ा सुनाई। उनके ड्राइवर राजकुमार उर्फ रमेश मल्होत्रा को छह महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई।
इस साल 4 मई को हाईकोर्ट ने नारायण साई की उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगाने की याचिका खारिज की। कोर्ट ने शुरुआती तौर पर पाया कि उन्हें अपनी सज़ा के खिलाफ अपील पर जल्द फैसले में कोई दिलचस्पी नहीं थी और वे मामले को टालने की कोशिश कर रहे थे।
नारायण साई के इस तर्क पर कि वे 11 साल से जेल में हैं और उनकी क्रिमिनल अपील पर फैसले में देरी हो रही है, हाईकोर्ट ने कहा,
"इसमें कोई शक नहीं कि याचिकाकर्ता ने अपनी जेल की सज़ा के 11 साल पूरे कर लिए हैं। हालांकि, सच्चाई यह है कि 2019 से अब तक दोषी याचिकाकर्ता ने अपील की अंतिम सुनवाई में सहयोग नहीं किया। उन्होंने कई याचिकाएं दायर करके अपील के दौरान अस्थायी या स्थायी ज़मानत पाने की कोशिश की। 2021 में ज़मानत याचिका को मेरिट के आधार पर खारिज करते हुए इस कोर्ट ने अपील की अंतिम सुनवाई के लिए तारीख तय की थी। हालांकि, रिकॉर्ड में यह बात है कि याचिकाकर्ता-आरोपी अपील की सुनवाई के लिए कभी तैयार नहीं होता है।"
कोर्ट ने यह भी देखा कि सज़ा रोकने (सस्पेंशन) की अर्ज़ी पर सुनवाई के दौरान, जब कोर्ट ने नारायण साईं के वकील से पूछा कि क्या वे मुख्य अपील पर "रोज़ाना" सुनवाई के लिए तैयार हैं तो वकील ने "निर्देश मिलने पर" कहा कि उन्हें सिर्फ़ सज़ा रोकने की अर्ज़ी पर बहस करने के निर्देश मिले हैं और अर्ज़ी का निपटारा होने के बाद ही वे मुख्य मामले पर बहस करने के लिए तैयार होंगे।
कोर्ट ने कहा,
"ऐसे हालात में दोषी ने खुद ही अपनी लंबी जेल की सज़ा वाली स्थिति पैदा की है। दूसरे शब्दों में, समय बीतने के लिए दोषी खुद ज़िम्मेदार है, इसलिए अब वह यह दावा नहीं कर सकता कि लंबी जेल और अपील की सुनवाई में देरी के कारण उसे अपील लंबित रहने तक ज़मानत पर रिहा किया जाए।"
इससे नाराज़ होकर नारायण साईं सुप्रीम कोर्ट पहुँचे। यह याचिका AoR आशिमा मंडला के ज़रिए दायर की गई।
इसी से जुड़ी एक और खबर में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नारायण साईं के पिता आसाराम को, जो राजस्थान में रेप केस में दोषी ठहराए जाने के बाद सज़ा काट रहे हैं, जेल में मदद के लिए अपनी पसंद का एक ट्रेंड केयरगिवर रखने की इजाज़त दी। AIIMS की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार किया, लेकिन यह भी कहा कि अगर उनकी हालत बिगड़ती है तो कोर्ट से दोबारा संपर्क किया जा सकता है।
Case: NARAYAN @NARAYAN SAI @MOTA BHAGWAN Versus STATE OF GUJARAT AND ANR. Diary No. 29992-2026


