सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सीएम के OSD के खिलाफ CBI FIR पर रोक लगाने से किया इनकार, बलपूर्वक कार्रवाई पर रोक लगाई
Shahadat
12 Oct 2026 1:50 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कर्तव्य अधिकारी (OSD) से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में दर्ज CBI FIR में कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की खंडपीठ ने मामले में FIR दर्ज करने के हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया। हालांकि, कोर्ट ने FIR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और निर्देश दिया कि मामले में कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा। खंडपीठ ने आगे कहा कि राज्य को जांच में सहयोग करना चाहिए।
राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास सिंह उपस्थित हुए। प्रतिवादी (हाईकोर्ट में जनहित याचिका याचिकाकर्ता) की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्री नायडू ने प्रस्तुत किया कि प्रतिवादी को राज्य सरकार की ओर से प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उसकी संपत्ति को ध्वस्त कर दिया गया। नायडू ने आग्रह किया कि प्रतिवादी को राज्य उत्पीड़न से भी सुरक्षा की आवश्यकता है।
जस्टिस शील नागू (जो जस्टिस दीपांकर दत्ता के साथ बैठे थे) के अलग होने के बाद मामला इस खंडपीठ के समक्ष रखा गया।
CBI की FIR पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय के विशेष कर्तव्य (OSD) राजबीर सिंह घुमन और पांच अन्य नामित आरोपियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और प्रभाव-व्यापार से संबंधित है। यह मामला सरकारी तबादलों और पोस्टिंग, निविदाओं, नीतिगत निर्णयों, लाइसेंसिंग और भूमि से संबंधित मामलों को प्रभावित करने के लिए कथित रिश्वत देने से संबंधित है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने 5 अक्टूबर, 2026 को FIR दर्ज की।
चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की हाईकोर्ट बेंच ने सोमवार को CBI को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के विशेष कर्तव्य अधिकारी (OSD) राजबीर सिंह घुमन से संबंधित आरोपों पर आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसने पंजाब राज्य और पंजाब पुलिस को निष्पक्ष जांच करने के लिए CBI को सभी सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।
वकील निखिल सराफ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश पारित किए गए। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि घुमन के खिलाफ आरोपों की जांच की मांग करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ED) के संचार के बावजूद पंजाब पुलिस उचित कार्रवाई करने में विफल रही है। हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्तुतियों के अनुसार, ED ने नितिन गोहल से जुड़े आरोपों को उजागर किया, जिन्होंने कथित तौर पर पंजाब सरकार से विभिन्न लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के लिए मध्यस्थ के रूप में काम किया।
आरोप अन्य बातों के अलावा, स्थानांतरण की सुविधा प्रदान करने, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच प्रदान करने, हथियार लाइसेंस की सुविधा प्रदान करने और अन्य लाभ हासिल करने से संबंधित हैं। हाईकोर्ट ने अपने समक्ष रखी गई सामग्री पर विचार करने के बाद CBI को आपराधिक मामला दर्ज करने और आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पंजाब सरकार की चुनौती CBI जांच के लिए हाईकोर्ट के निर्देश को पलटने की मांग की थी।
Case Title : State of Punjab v Nikhil Saraf

