सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा में शामिल होने के लिए कोर्ट स्टाफ की 'प्रैक्टिस' की शर्त में ढील देने से इनकार किया

  • सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा में शामिल होने के लिए कोर्ट स्टाफ की प्रैक्टिस की शर्त में ढील देने से इनकार किया

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को न्यायिक सेवा में शामिल होने के इच्छुक कोर्ट कर्मचारियों के लिए अनिवार्य 'प्रैक्टिस' की शर्त में एक बार के लिए ढील देने से इनकार किया। कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि न्यायिक पदों को अन्य कैडरों के लिए प्रमोशन का जरिया नहीं माना जा सकता।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कोर्ट स्टाफ द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज किया, जिनमें 'भूमिका ट्रस्ट' मामले के फैसले में बदलाव की मांग की गई। उस फैसले में 31 मार्च 2027 तक ग्रेजुएट्स के लिए 'प्रैक्टिस' की शर्त को हटा दिया गया था। कर्नाटक के 21 अधिकारियों (जो कोर्ट स्टाफ हैं) ने भी अपने लिए इस शर्त में ढील की मांग की थी।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट आदित्य सोंधी ने कहा कि अलग-अलग राज्य, 'भूमिका ट्रस्ट' मामले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नौकरी कर रहे उम्मीदवारों (इन-सर्विस कैंडिडेट्स) के मामले में अलग-अलग तरीके से लागू कर रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में नौकरी कर रहे लोगों के लिए 'ट्रांसफर' के जरिए भर्ती की अनुमति है, जबकि कर्नाटक का कहना है कि ऐसे उम्मीदवारों को 'ओपन कैटेगरी' (सामान्य श्रेणी) में प्रतिस्पर्धा करनी होगी।

    CJI सूर्यकांत ने जवाब दिया कि अलग भर्ती प्रक्रिया (चैनल) बनाना राज्यों का काम है, जो वे अनुच्छेद 309 के तहत या कानून बनाकर कर सकते हैं। लेकिन कोर्ट भर्ती का कोई नया तरीका शुरू करने का निर्देश नहीं देगा।

    चीफ जस्टिस ने कहा,

    "यह राज्यों का मामला है। वे अनुच्छेद 309 के तहत या कानून बनाकर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन हम भर्ती का कोई नया तरीका शुरू करने का निर्देश देने से बचना चाहेंगे।"

    सोंधी ने दलील दी कि कर्नाटक में नौकरी कर रहे लोग इन नियमों से प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि हाईकोर्ट ने अपनी प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया।

    उन्होंने कहा,

    "मैं प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हूं। कर्नाटक में 2026 तक नौकरी कर रहे उम्मीदवारों को अनुमति दी गई।"

    सोंधी ने जोर देकर कहा कि यह नियम पूरे देश में एक समान रूप से लागू होना चाहिए, क्योंकि कम-से-कम तीन राज्यों में अभी भी नौकरी कर रहे उम्मीदवारों को अनुमति दी जा रही है।

    चीफ जस्टिस ने जवाब दिया कि अगर उन राज्य नियमों को चुनौती दी जाती है तो कोर्ट उस पर विचार करेगा, लेकिन वह तय मानकों में कोई ढील नहीं देगा।

    CJI सूर्य कांत ने सख्ती से कहा,

    "आप न्यायिक सेवा को अन्य कैडरों के लिए प्रमोशन का जरिया नहीं बना सकते।"

    यह आवेदन AoR (एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड) अगम शर्मा के माध्यम से दायर किया गया।

    Case Title : MA Filed by YOGESH B & OTHERS in BHUMIKA TRUST Vs UNION OF INDIA

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