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सुप्रीम कोर्ट ने बच्चा पैदा करने के लिए दोषी को पैरोल देने के आदेश में दखल देने से इनकार किया

Avanish Pathak
4 Aug 2022 7:49 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चा पैदा करने के लिए दोषी को पैरोल देने के आदेश में दखल देने से इनकार किया
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 अगस्त) को राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें उम्रकैद पाए एक कैदी को अपनी पत्नी के साथ वैवाहिक संबंध बनाने के लिए, ताकि वह एक बच्चा पैदा कर सके, पैरोल देने का आदेश दिया गया था, जबकि उसकी 15 दिनों की पैरोल अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि 5 अप्रैल, 2022 को पारित हाईकोर्ट के आदेश में की गई कुछ टिप्पणियों पर उसका "आरक्षण" हैं।

जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने हालांकि राज्य की ओर से दायर एसएलपी में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि राज्य हाईकोर्ट के समक्ष सभी दलीलें उठा सकता है। इसने यह भी कहा कि वैवाहिक संबंध निभाने के लिए पैरोल/फर्लो के लिए आवेदन करने वाले किसी तीसरे व्यक्ति की याचिका की गुणदोष के आधार पर जांच की जाएगी।

"जबकि हमें आक्षेपित आदेश में की गई कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति है, हम उस निर्देश में हस्तक्षेप के इच्छुक नहीं हैं, जिसे लागू किया गया होगा। हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि याचिकाकर्ता सभी दलीलों और तर्कों हाईकोर्ट के समक्ष उठा सकते हैं। यदि कोई तीसरा व्यक्ति समान कारण बताते हुए पैरोल/फर्लो के लिए आवेदन करता है, तो ऐसी याचिका की गुण-दोष के आधार पर जांच की जाएगी।"

5 अप्रैल, 2022 को राजस्थान हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने कहा कि दोषी-कैदी को पत्नी के साथ संतान पैदा करने के उद्देश्य से वैवाहिक संबंध स्‍थापित करने से इनकार करने से पत्नी के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

इस संबंध में अदालत ने आजीवन कारावास के दोषी को 15 दिन की पैरोल दी थी।

राज्य सरकार की चुनौती

हालांकि हाईकोर्ट के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। राज्य सरकार के अनुसार, यह आदेश राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स, 2021 (2021 रूल्स) का उल्लंघन है।

याचिका में कहा गया था कि हत्या के दोषी ने पैरोल के लिए आवेदन करते समय प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया था, जिसे पहली बार जेल अधीक्षक के पास जाना चाहिए था।

हालांकि, उसने सीधे जिला कलेक्टर से संपर्क किया और हाईकोर्ट ने प्रक्रियात्मक खामियों के बावजूद, राजस्थान प्र‌िजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स, 2021 के उल्लंघन में, रिट याचिका की अनुमति दी और प्रतिवादी को पंद्रह दिनों के लिए पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया।

अपील में कहा गया है, "इसके अलावा, आकस्मिक मामलों में पैरोल की मंजूरी धारा 11 में उल्लिखित आधारों तक ही सीमित है। जब कानून स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है तो हाईकोर्ट मनमाने ढंग से बाहरी विचारों के आधार पर आधार नहीं जोड़ सकता था।"

केस टाइटलः राजस्‍थान राज्य बनाम नंद लाल


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