कॉपीराइट विवाद में इलैयाराजा को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसले में दखल से किया इनकार

  • कॉपीराइट विवाद में इलैयाराजा को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसले में दखल से किया इनकार

    सुप्रीम कोर्ट ने म्यूजिक कंपोजर इलैयाराजा की चुनौती पर 'एन इनिया पोन निलावे' गाने के रीक्रिएटेड वर्शन के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया। इसके बजाय, बेंच ने साफ किया कि हाई कोर्ट की टिप्पणियां शुरुआती तौर पर (prima facie) हैं।

    जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच, म्यूजिक कंपोजर द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश के खिलाफ दायर स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) पर सुनवाई कर रही थी।

    यह विवाद वेल्स फिल्म इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा गाने के रीक्रिएटेड वर्शन के इस्तेमाल से जुड़ा है। वेल्स ने एक एग्रीमेंट के तहत इलैयाराजा से लाइसेंस मिलने का दावा किया। वहीं, सारेगामा इंडिया लिमिटेड का तर्क था कि फिल्म के ओरिजिनल प्रोड्यूसर से असाइनमेंट के जरिए अधिकार उनके पास हैं।

    दिल्ली हाईकोर्ट के एक सिंगल जज ने सारेगामा को इंजंक्शन (रोक का आदेश) दिया, जिसके बाद इलैयाराजा ने डिवीजन बेंच के सामने अपील की। ​​इस साल मई में, जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने अपील खारिज की। बेंच ने कहा कि उनका कॉपीराइट गाने के संगीत तक ही सीमित है और यह लिरिक्स या साउंड रिकॉर्डिंग तक नहीं फैला है।

    हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होकर रिव्यू पेटिशन दायर की गई, जिसे भी खारिज कर दिया गया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में यह SLP दायर की गई।

    सुप्रीम कोर्ट के सामने सीनियर एडवोकेट सी आर्यमा सुंदरम ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के दूरगामी परिणाम होंगे।

    उन्होंने तर्क दिया,

    "इस आदेश के आधार पर अब तीन और मुकदमे दायर किए गए।"

    कॉपीराइट एक्ट, 1957 की धारा 13(4) का हवाला देते हुए उन्होंने तर्क दिया,

    "13(4) का पूरा मकसद ही खत्म हो गया।"

    बता दें, धारा 13(4) में प्रावधान है कि सिनेमैटोग्राफ फिल्म या साउंड रिकॉर्डिंग में कॉपीराइट, मूल काम (Underlying Work) में अलग कॉपीराइट को प्रभावित नहीं करता है।

    सारेगामा की दलील का ज़िक्र करते हुए सुंदरम ने एक हिस्से की ओर इशारा किया, जिसमें कहा गया,

    "भले ही वादी ने साउंड रिकॉर्डिंग के उल्लंघन का आरोप नहीं लगाया, लेकिन उसने गाने के म्यूज़िकल और साहित्यिक कामों में अपने कॉपीराइट के उल्लंघन का आरोप लगाया।"

    इसके बाद सुंदरम ने हाईकोर्ट के उस आदेश की ओर इशारा किया, जिसमें कहा गया कि इलैयाराजा "इसलिए विवादित गाने में शामिल म्यूज़िकल काम, यानी उसके म्यूज़िकल हिस्से के इस्तेमाल या अडैप्टेशन के लिए किसी भी तीसरे पक्ष के साथ अनुबंध करने के हकदार थे।"

    उन्होंने कहा,

    "साउंड रिकॉर्डिंग उनका मामला नहीं है। उनका मामला म्यूज़िकल काम है।"

    तर्क दिया कि अडैप्टेशन का अधिकार केवल इलैयाराजा के पास था।

    जब जस्टिस चंद्रन ने टिप्पणी की कि सुंदरम साउंड रिकॉर्डिंग का भी दावा कर रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया,

    "मैं कोई साउंड रिकॉर्डिंग नहीं दे रहा हूँ।"

    जब सुंदरम ने दलील दी कि पार्टियों को एक ही मुद्दे पर मुकदमेबाजी के लिए मजबूर किया जा रहा है तो बेंच ने पूछा कि वे बेवजह क्यों लड़ रहे हैं, जिस पर सुंदरम ने जवाब दिया, "क्योंकि वे मुझे रोक रहे हैं (इंजंक्शन लगा रहे हैं)।" इंजंक्शन के संबंध में उन्होंने कहा कि सिंगल जज के आदेश में केवल 30 लाख रुपये जमा करने की आवश्यकता है। उन्होंने बेंच को बताया कि यह राशि निर्माताओं द्वारा भुगतान कर दी गई और आदेश का पालन किया गया और वास्तविक विवाद डिवीज़न बेंच के निष्कर्षों के साथ था, न कि जमा राशि के साथ।

    याचिकाकर्ता द्वारा दी गई दलीलों पर विचार करने के बाद बेंच को हाईकोर्ट के आदेश में कोई गलती नहीं मिली, इसलिए हस्तक्षेप करने से इनकार किया।

    बेंच ने कहा,

    "हमारी राय है कि प्रतिवादी के अनुरोध के अनुसार इंजंक्शन देने वाला अंतरिम आदेश पारित करने में हाईकोर्ट द्वारा कोई गलती नहीं की गई, कानून की गलती तो दूर की बात है।"

    सुंदरम के इस अनुरोध पर कि यह स्पष्ट किया जाए कि मामले में निष्कर्ष प्रथम दृष्टया (Prima Facie) हैं, और इसे मिसाल (Precedent) के तौर पर न माना जाए, बेंच ने अनुरोध स्वीकार कर लिया।

    बेंच ने स्पष्ट किया,

    "यह स्पष्ट करने की आवश्यकता नहीं है कि विवादित फैसले में की गई टिप्पणियां प्रथम दृष्टया हैं और वे विचाराधीन मुद्दे पर निर्णय लेने के उद्देश्य से हैं।"

    ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए SLP खारिज की गई और दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा गया।

    Case Title : Ilaiyaraaja v Saregama India Limited

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