CAPF से जुड़ा अवमानना का मामला लिस्ट से क्यों हटाया गया: सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से पूछा
Shahadat
29 Sept 2026 8:03 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से पूछा कि 46 भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों को पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में डेप्युटेशन पर भेजने से जुड़ी अवमानना याचिकाओं के एक बैच को कॉज़ लिस्ट से क्यों हटा दिया गया, जबकि इन मामलों को दोपहर 2 बजे लिस्ट करने का न्यायिक आदेश था। कोर्ट ने आदेश दिया कि अवमानना याचिकाओं को बुधवार दोपहर 2 बजे फिर से लिस्ट किया जाए और रजिस्ट्री से स्पष्टीकरण मांगा है कि इसे आज की कॉज़ लिस्ट से क्यों हटाया गया।
यह मामला दोपहर 2 बजे जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच के सामने लिस्ट किया गया। हालांकि, आरोप लगाया गया कि पार्टियों को बिना किसी सूचना के और कोर्ट के पूर्व आदेश के बिना ही दोपहर 12 बजे के आसपास इसे कॉज़ लिस्ट से हटा दिया गया। सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्णकुमार (अवमानना याचिकाकर्ताओं की ओर से) ने कोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया।
गुरु कृष्णकुमार ने बेंच से कहा:
"मेरे सहयोगियों का कहना है कि निर्देश [सुप्रीम कोर्ट की] लिस्टिंग ब्रांच से आए हैं। मुझे नहीं पता कि क्या हो रहा है। यह थोड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है। हमने दूसरी पार्टी को सूचित किया। माई लॉर्ड्स, आपको याद होगा कि उन्होंने [प्रतिवादियों] एक हलफनामा दायर किया, वे उस हलफनामे को बदलना चाहते थे। उन्होंने ऐसा दोपहर 12 बजे के बाद किया, बिना किसी सूचना या किसी और चीज़ के।"
इसके बाद बेंच ने कोर्ट मास्टर से पूछा कि क्या इस बारे में कोई पूर्व जानकारी थी कि ऐसा क्यों हुआ।
इसके बाद कोर्ट ने मामले को फिर से लिस्ट करने का आदेश दिया:
"हमने पहले ये आदेश दिए। यह मामला आज की लिस्ट में आइटम नंबर 32 पर है। हालांकि, कोर्ट को बताया गया कि लंच ब्रेक के दौरान इस केस को कॉज़ लिस्ट से हटा दिया गया। चूंकि आज दोपहर 2 बजे केस को लिस्ट करने का न्यायिक आदेश था, इसलिए हम निर्देश देते हैं कि इस केस को दूसरे संबंधित मामलों के साथ कल यानी 30.09.2026 को दोपहर 2 बजे फिर से लिस्ट किया जाए। साथ ही रजिस्ट्री को यह बताना होगा कि न्यायिक आदेश होने के बावजूद मामले को कॉज़ लिस्ट से क्यों हटाया गया।"
संजय प्रकाश और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य मामले में कोर्ट के 23 मई, 2025 के फैसले का पालन न करने के आरोप में गृह मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ अवमानना याचिकाएं दायर की गईं। 22 सितंबर के आदेश के अनुसार, समय की कमी के कारण कोर्ट इस मामले की सुनवाई नहीं कर सका, इसलिए इसे आज सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया।
2 सितंबर के आदेश के अनुसार, कोर्ट ने गृह मंत्रालय से 46 भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों को पांच CAPF में डेप्युटेशन पर भेजने के बारे में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा था, जबकि पहले CAPF कैडर में डेप्युटेशन पदों को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट अपने पिछले निर्देशों के पालन की जांच कर रहा था और उसने विशेष रूप से गृह मंत्रालय (MHA) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के सचिवों से 2025 के फैसले को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा था।
MHA सेक्रेटरी ने एक हलफ़नामा दायर किया, जिसके अनुसार 23 मई 2025 के बाद सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (SAG) लेवल तक के 46 IPS अधिकारियों को डेपुटेशन पर CAPF में लाया गया।
उल्लेखनीय है कि संसद ने इस साल मई 2025 के फ़ैसले से निपटने के लिए एक कानून पास किया - सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट, 2026। इस कानून में प्रावधान है कि इंस्पेक्टर जनरल रैंक के कुल पदों में से 50%, एडिशनल डायरेक्टर जनरल रैंक के कम-से-कम 67% पद और स्पेशल डायरेक्टर जनरल व डायरेक्टर जनरल रैंक के सभी पद डेपुटेशन पर इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) अधिकारियों से भरे जाएंगे।
हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने CAPF एक्ट 2026 की वैधता को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।
Case Details : Mahendra Singh Deo v Govind Mohan and others

