BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने सावरकर पर टिप्पणी के लिए राहुल गांधी के खिलाफ हेट स्पीच का मामला रद्द किया

Shahadat

14 Aug 2026 12:24 PM IST

  • BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने सावरकर पर टिप्पणी के लिए राहुल गांधी के खिलाफ हेट स्पीच का मामला रद्द किया

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में लंबित निजी आपराधिक शिकायत रद्द की। उन पर दक्षिणपंथी विचारक वीडी सावरकर को बदनाम करके सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप था।

    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने यह देखते हुए कार्यवाही रद्द की कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मुकदमा चलाने के लिए कोई मंज़ूरी नहीं दी थी।

    गांधी ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी उस समनिंग ऑर्डर (पेश होने के आदेश) को चुनौती दे रहे थे, जिसमें उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153-A (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 के तहत अपराधों के लिए मुकदमे का सामना करना था। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कार्यवाही रद्द करने से इनकार करने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

    शुक्रवार, जब मामला सुनवाई के लिए आया तो जस्टिस दत्ता ने पूछा कि क्या राज्य ने मंज़ूरी दी। राज्य की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने जवाब दिया कि कोई मंज़ूरी नहीं दी गई। CrPC की धारा 196 के अनुसार, IPC की धारा 153A के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए राज्य सरकार की मंज़ूरी ज़रूरी है। शिकायतकर्ता के वकील ने अनुरोध किया कि यदि मंज़ूरी नहीं है तो समनिंग ऑर्डर को रद्द कर दिया जाए और मामले को मजिस्ट्रेट के पास नए सिरे से विचार के लिए वापस भेज दिया जाए। वकील ने कहा कि अगर मंज़ूरी ज़रूरी है तो वह आवश्यक कदम उठाएंगे।

    हालांकि, जस्टिस दत्ता ने बताया कि संज्ञान लेने से पहले मंज़ूरी अनिवार्य है।

    जस्टिस दत्ता ने कहा,

    "अगर मंज़ूरी नहीं है, तो मामला वहीं खत्म हो जाता है।"

    इसके बाद बेंच ने मामला रद्द करने का आदेश दिया।

    बेंच ने कहा,

    "यूपी राज्य द्वारा दायर हलफनामे में अपीलकर्ता-आरोपी पर मुकदमा चलाने के लिए मंज़ूरी दिए जाने का कोई ज़िक्र नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश रद्द किए जाते हैं।"

    गांधी की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए।

    पिछले साल, सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाई। हालांकि, रोक लगाते समय जस्टिस दत्ता ने सावरकर पर गांधी की टिप्पणियों पर मौखिक रूप से कड़ी नाराजगी जताई और सवाल किया कि क्या स्वतंत्रता सेनानियों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में ऐसी बातें दोहराई गईं तो कोर्ट उनके खिलाफ़ "स्वतः संज्ञान" (suo motu) लेते हुए अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू करेगा।

    4 अप्रैल, 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। दिसंबर 2024 में कोर्ट ने उन्हें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए भाषण के मामले में आरोपी के तौर पर तलब किया था; उस भाषण में उन्होंने कथित तौर पर कहा कि सावरकर अंग्रेजों के नौकर थे और वे अंग्रेजों से पेंशन लेते थे।

    वकील नृपेंद्र पांडे ने एक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि गांधी ने समाज में नफरत फैलाने के इरादे से सावरकर को अंग्रेजों का नौकर बताया और कहा कि वे अंग्रेजों से पेंशन लेते थे।

    लखनऊ के एडिशनल सिविल जज (सीनियर डिवीज़न)/ACJM आलोक वर्मा ने दिसंबर 2024 में अपने आदेश में कहा था,

    "प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहले से छपे पैम्फलेट और लीफलेट बांटना यह दिखाता है कि राहुल गांधी ने समाज में नफरत और दुश्मनी फैलाकर देश की बुनियादी विशेषताओं को कमजोर किया और उनका अपमान किया।"

    हाईकोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि गांधी के पास CrPC की धारा 397 (BNSS की धारा 438) के तहत सेशन जज के पास जाने का विकल्प मौजूद है। इसे देखते हुए कोर्ट ने उनकी याचिका का निपटारा किया।

    Case Details: RAHUL GANDHI v. STATE OF U.P. AND ANR., SLP(Crl) No. 6196/2025

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