सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा- दिव्यांगों के लिए कैब सेवाओं में व्हीलचेयर की सुविधा सुनिश्चित की जाए

Praveen Mishra

23 March 2026 6:21 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा- दिव्यांगों के लिए कैब सेवाओं में व्हीलचेयर की सुविधा सुनिश्चित की जाए

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए देशभर में चलने वाली कैब सेवाओं को दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs) के अनुकूल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि कैब में व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरणों को रखने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि दिव्यांगों की आवाजाही सुगम हो सके।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मामले को 24 मार्च तक स्थगित करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से सहायता मांगी।

    'फर्स्ट और लास्ट माइल' कनेक्टिविटी पर जोर

    कोर्ट एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच सुनिश्चित करने हेतु 'फर्स्ट और लास्ट माइल' कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की मांग की गई है। यानी घर से बस/रेलवे स्टेशन तक और वहां से गंतव्य तक पहुंच को आसान बनाना।

    कैब में व्हीलचेयर रखने में समस्या

    याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नियम तो मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा। अधिकतर कैब में CNG सिलेंडर लगे होने के कारण व्हीलचेयर रखने में दिक्कत आती है, जिससे दिव्यांगों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

    विशेष रूप से डिजाइन की गई कैब का सुझाव

    सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि दिव्यांगों के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई कैब या कैरियर की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा,

    “हमें ऐसे उपाय खोजने होंगे जिससे इन लोगों की मदद हो सके।”

    कोर्ट ने यह भी कहा कि महानगरों में कैब सेवाओं का व्यापक उपयोग होता है, इसलिए उन्हें भी सार्वजनिक परिवहन का हिस्सा मानते हुए दिव्यांगों के अनुकूल बनाया जाना चाहिए।

    समिति के समक्ष मुद्दा लंबित

    प्रतिवादियों की ओर से बताया गया कि यह मुद्दा पहले से ही एक समिति के समक्ष विचाराधीन है, जो राजीव रतूरी मामले में गठित की गई थी। हालांकि, समिति की संरचना संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए मामले को पुनः सूचीबद्ध किया।

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगों की सुविधा सुनिश्चित करना आवश्यक है और इसके लिए व्यावहारिक समाधान तलाशना समय की मांग है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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