'घुसपैठियों को मिल रहा आधार': सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 6 साल से कम बच्चों तक ही आधार बनाने की मांग

Praveen Mishra

9 April 2026 4:37 PM IST

  • घुसपैठियों को मिल रहा आधार: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 6 साल से कम बच्चों तक ही आधार बनाने की मांग

    सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि आधार कार्ड केवल 6 वर्ष तक के बच्चों को ही जारी किया जाए और इसके बाद आधार बनवाने की प्रक्रिया उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या तहसीलदार कार्यालय के माध्यम से कराई जाए।

    यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई है, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में मांग की गई है कि आधार केवल बच्चों के लिए जारी किया जाए और किशोरों व वयस्कों के लिए सख्त दिशानिर्देश बनाए जाएं, ताकि घुसपैठिए इसका दुरुपयोग कर भारतीय नागरिक के रूप में पहचान न बना सकें।

    याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि कॉमन सर्विस सेंटर और अन्य स्थानों पर स्पष्ट रूप से बोर्ड लगाए जाएं, जिनमें लिखा हो कि “आधार केवल पहचान का प्रमाण है, नागरिकता, पता या जन्मतिथि का नहीं।” साथ ही, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी दस्तावेज प्राप्त करने पर मिलने वाली सजा को प्रमुखता से प्रदर्शित करने की भी मांग की गई है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में सत्यापन प्रक्रिया कमजोर है, जिसके कारण घुसपैठिए आसानी से आधार कार्ड बनवा लेते हैं और फिर राशन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे अन्य दस्तावेज भी हासिल कर लेते हैं।

    याचिकाकर्ता के अनुसार, आधार अधिनियम की धारा 3 में “निवासी” शब्द के कारण एक खामी है, जिससे गैर-नागरिक भी आधार बनवा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि UIDAI ने 22 अगस्त 2023 के कार्यालय ज्ञापन में विदेशी और नागरिकों के बीच अंतर की बात कही है, लेकिन कानून में इसे स्पष्ट रूप से लागू नहीं किया गया है।

    याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में ग्राम प्रधान या पार्षद की सिफारिश पर भी आधार बन जाता है, जिससे अवैध प्रवासी इसका लाभ उठाकर सरकारी योजनाओं का फायदा लेते हैं।

    याचिकाकर्ता ने उत्तर-पूर्वी राज्यों की स्थिति पर भी चिंता जताई है, जहां जनजातीय समुदाय कम दस्तावेज बनवाते हैं और ऐसे में घुसपैठियों के कारण उनकी पहचान और जमीन पर खतरा पैदा हो सकता है।

    याचिका में कहा गया है कि 31 मार्च 2026 तक लगभग 144 करोड़ आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं, इसलिए अब केवल नवजात बच्चों के लिए ही आधार की आवश्यकता है और 6 वर्ष की सीमा तय करना उचित होगा।

    इसके अलावा, याचिका में दावा किया गया है कि अवैध प्रवासी पश्चिम बंगाल के रास्ते देश के अन्य हिस्सों में पहुंचते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं। साथ ही, मिजोरम, दिल्ली और अन्य क्षेत्रों में भी अवैध प्रवासियों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है।

    अंत में, याचिका में यह भी कहा गया है कि नागरिकता साबित करने का दायित्व व्यक्ति पर होना चाहिए और कानून में इस संबंध में स्पष्ट प्रावधान किए जाने चाहिए।

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