23 साल से लंबित बहादुरी सम्मान पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- कोर्ट सरकार के रवैये से खुश नहीं

Praveen Mishra

20 July 2026 10:52 PM IST

  • 23 साल से लंबित बहादुरी सम्मान पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- कोर्ट सरकार के रवैये से खुश नहीं

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश के पूर्व पुलिस अधिकारी विवेक सिंह चौहान को राष्ट्रपति वीरता पदक (President's Gallantry Medal) देने के मामले में केंद्र सरकार की लगातार हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि सरकार इस विवाद को बेवजह लंबा खींच रही है और स्पष्ट किया कि इस मामले में अब और समय नहीं दिया जाएगा।

    जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ गृह सचिव गोविंद मोहन की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल की है, जिसने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। उन्होंने कहा कि सरकार की आपत्ति किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सिद्धांत (Principle) के आधार पर है। उनका तर्क था कि सम्मान न्यायालय के आदेश (Mandamus) से नहीं, बल्कि सरकार द्वारा प्रदान किए जाते हैं।

    इस पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने पूछा कि यदि सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की है, तो भी आदेश का पालन करने में क्या बाधा है। उन्होंने कहा, "पहले आदेश का पालन कीजिए, फिर रिव्यू पर बहस कीजिए।"

    जब केंद्र ने कहा कि यदि पुनर्विचार याचिका स्वीकार हो गई तो सम्मान वापस लिया जा सकता है, तो पीठ ने कहा कि ऐसा होने पर बाद में कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन फिलहाल आदेश का पालन क्यों नहीं किया जा रहा।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, "या तो सरकार स्पष्ट बयान दे, नहीं तो आदेश की अनदेखी कीजिए और 15 अगस्त को यह सम्मान हम स्वयं दे देंगे।"

    वहीं, पुलिस अधिकारी की ओर से पेश वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल पिछले 23 वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे हैं और यदि इस बार भी देरी हुई तो राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार अब अगले वर्ष ही मिल सकेगा, क्योंकि यह सम्मान केवल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर ही प्रदान किया जाता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह का अंतिम अवसर देते हुए मामले को 29 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया और स्पष्ट किया कि अब कोई और समय नहीं दिया जाएगा। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने यह भी कहा कि सरकार तक यह संदेश पहुंचा दिया जाए कि "कोर्ट सरकार के रवैये से खुश नहीं है।"

    पृष्ठभूमि

    मामला वर्ष 2003 का है, जब तत्कालीन थाना प्रभारी विवेक सिंह चौहान ने डकैत विरोधी अभियान के दौरान दो डकैतों को मुठभेड़ में मार गिराया था। इस कार्रवाई में वह स्वयं भी घायल हुए थे। मजिस्ट्रियल जांच में उन्हें क्लीन चिट मिलने के बाद उनके नाम की राष्ट्रपति वीरता पदक के लिए अनुशंसा की गई थी।

    लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिसंबर 2024 में केंद्र सरकार को एक महीने के भीतर चौहान को राष्ट्रपति वीरता पदक देने का निर्देश दिया था। हालांकि, केंद्र ने उन्हें Gallantry Medal (GM) प्रदान करने की मंजूरी दी, जिसे हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति वीरता पदक से अलग और निम्न श्रेणी का सम्मान बताते हुए आदेश की अवहेलना माना। इसके बाद हाईकोर्ट ने गृह सचिव को प्रथमदृष्टया अवमानना का दोषी माना था, जिसके खिलाफ मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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