शादी से पहले किसी पर भरोसा न करें: शारीरिक संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट ने दी सावधानी बरतने की सलाह

Praveen Mishra

16 Feb 2026 5:18 PM IST

  • शादी से पहले किसी पर भरोसा न करें: शारीरिक संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट ने दी सावधानी बरतने की सलाह

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाह से पहले लड़का-लड़की एक-दूसरे के लिए मूलतः अजनबी होते हैं, इसलिए शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने के मामलों में अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए। अदालत एक ऐसे व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर झूठे विवाह के वादे पर दुष्कर्म का आरोप है।

    जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।

    अदालत की टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा:

    “शायद हम पुराने विचारों के हैं, लेकिन विवाह से पहले लड़का और लड़की अजनबी होते हैं। हम समझ नहीं पा रहे कि शादी से पहले शारीरिक संबंध कैसे बनाए जा सकते हैं। शादी से पहले किसी पर विश्वास करते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।”

    मामला क्या है

    अभियोजन के अनुसार, लगभग 30 वर्षीय शिकायतकर्ता की मुलाकात 2022 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर आरोपी से हुई थी। आरोप है कि आरोपी ने विवाह का झूठा आश्वासन देकर दिल्ली और बाद में दुबई में कई बार शारीरिक संबंध बनाए।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपी के कहने पर वह दुबई गई, जहां उसने शादी का वादा कर संबंध बनाए और बिना अनुमति के निजी वीडियो भी रिकॉर्ड किए, तथा विरोध करने पर उन्हें वायरल करने की धमकी दी। बाद में उसे पता चला कि आरोपी पहले से विवाहित था और 19 जनवरी 2024 को उसने दूसरी शादी भी कर ली।

    अदालत की पूछताछ

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि शिकायतकर्ता शादी से पहले दुबई क्यों गई। सरकारी वकील ने बताया कि दोनों विवाह की योजना बना रहे थे, लेकिन न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यदि महिला विवाह को लेकर गंभीर थी, तो उसे शादी से पहले नहीं जाना चाहिए था।

    मध्यस्थता का सुझाव

    खंडपीठ ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में, जहां संबंध सहमति से बने हों, उन्हें आपराधिक मुकदमे और सजा के रूप में देखने के बजाय मध्यस्थता के माध्यम से समाधान तलाशा जा सकता है।

    “ये ऐसे मामले नहीं हैं जिन्हें ट्रायल और सजा तक ले जाया जाए, जब संबंध सहमति से बना हो,” अदालत ने कहा।

    मामले को संभावित समझौते की संभावना तलाशने के लिए बुधवार तक स्थगित कर दिया गया।

    पृष्ठभूमि

    इससे पहले सत्र न्यायालय और दिल्ली हाईकोर्ट दोनों ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। 18 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया आरोप दर्शाते हैं कि विवाह का वादा शुरुआत से ही झूठा था, विशेषकर क्योंकि आरोपी पहले से विवाहित था और बाद में दूसरी शादी भी कर चुका था।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि विवाह का वादा दुर्भावनापूर्ण तरीके से और बिना विवाह के इरादे के किया गया हो, तो उस आधार पर प्राप्त सहमति वैध नहीं मानी जा सकती।

    इसी आदेश को चुनौती देते हुए आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है।

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