देश में भाईचारा बढ़ाएं राजनीतिक नेता, आपसी सम्मान के आधार पर लड़े जाएं चुनाव : सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

17 Feb 2026 3:09 PM IST

  • देश में भाईचारा बढ़ाएं राजनीतिक नेता, आपसी सम्मान के आधार पर लड़े जाएं चुनाव : सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौखिक रूप से कहा कि देश में भाईचारे को बढ़ावा देना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है और सभी दलों को संवैधानिक मर्यादा का पालन करते हुए आपसी सम्मान के आधार पर चुनाव लड़ना चाहिए।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ नौ व्यक्तियों द्वारा दायर उस रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले “संवैधानिक मूल्यों के विपरीत” भाषणों को रोकने के लिए दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई है। यह याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हालिया भाषणों और बीजेपी असम द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो के बाद दायर की गई, जिन्हें एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला बताया गया।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि स्थिति अत्यंत विषाक्त होती जा रही है और इस पर न्यायालय को हस्तक्षेप करना चाहिए। हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि याचिका वस्तुतः एक विशेष व्यक्ति को लक्ष्य बनाकर दायर की गई प्रतीत होती है, क्योंकि इसमें मुख्यतः उन्हीं के भाषणों का उल्लेख है। सिब्बल ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ राहत नहीं मांगी गई है और उन्होंने याचिका से संबंधित संदर्भ हटाने का आश्वासन दिया। सीजेआई ने सुझाव दिया कि याचिका वापस लेकर संवैधानिक सिद्धांतों पर केंद्रित नई याचिका दायर की जाए, ताकि किसी दल या व्यक्ति के खिलाफ पक्षपात का आभास न हो।

    खंडपीठ ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को संवैधानिक नैतिकता, संवैधानिक मूल्यों, पारस्परिक सम्मान और आत्मसम्मान का पालन करना चाहिए। जस्टिस नागरत्ना ने भी कहा कि राजनीतिक नेताओं को अंततः देश में भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए और सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए। सिब्बल ने तर्क दिया कि आचार संहिता लागू होने से पहले दिए गए भड़काऊ भाषण चुनाव अवधि में भी प्रसारित होते रहते हैं, जिन पर निर्वाचन आयोग कार्रवाई नहीं करता, इसलिए मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए भी दिशानिर्देश आवश्यक हैं।

    पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि पहले भी ऐसे मुद्दों पर संयम बरतने की अपील की गई है और भारत एक परिपक्व लोकतंत्र है, जहाँ राजनीतिक मतभेद सम्मानपूर्वक व्यक्त किए जाने चाहिए। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि वर्तमान याचिका ठीक प्रकार से तैयार नहीं है और इस पर विचार के लिए एक निष्पक्ष तथा वस्तुनिष्ठ याचिका आवश्यक है। अंततः सिब्बल के अनुरोध पर मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया, इस दौरान नई याचिका दायर की जाएगी।

    याचिका पूर्व सिविल सेवकों, राजनयिकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित बारह नागरिकों के समूह द्वारा दायर की गई है। इसमें विभिन्न सार्वजनिक पदाधिकारियों द्वारा दिए गए कथित भड़काऊ और विभाजनकारी भाषणों का उल्लेख करते हुए सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि ऐसे भाषण संवैधानिक मूल्यों — समानता, धर्मनिरपेक्षता, बंधुत्व तथा अनुच्छेद 14 और 21 के मानकों — के अनुरूप होने चाहिए और इसके लिए उपयुक्त दिशानिर्देश बनाए जाएं, बिना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाए।

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