आग हादसे में बेटी खोने वाले पिता ने आपदा प्रबंधन व आपातकालीन प्रतिक्रिया सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की PIL

Praveen Mishra

1 Dec 2025 10:28 PM IST

  • आग हादसे में बेटी खोने वाले पिता ने आपदा प्रबंधन व आपातकालीन प्रतिक्रिया सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की PIL

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें देशभर में आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है। याचिका में विशेष रूप से “राइट टू इमरजेंसी प्रोटेक्शन” को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने की भी अपील की गई है।

    यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता, जो स्वयं पेश हुए, ने बताया कि वर्ष 2019 में आग की एक घटना में उनकी बेटी की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने दलील दी कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम (NDMA) और नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) का प्रभावी क्रियान्वयन न होने के कारण हर साल हजारों लोगों की जान चली जाती है और अनेक परिवारों को अपूरणीय क्षति झेलनी पड़ती है।

    PIL में उठाए गए मुख्य मुद्दे

    याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे:

    • फायर सर्विसेस, सड़क आपातकालीन प्रतिक्रिया और आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन की कमी का तत्काल मूल्यांकन करें और उसे भरें।
    • गृह मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, NDMA और सभी राज्य आपदा प्राधिकरणों को निर्देश दिया जाए कि वे:
      • आपातकालीन प्रतिक्रिया उपलब्धता और प्रदर्शन पर राष्ट्रीय जवाबदेही डैशबोर्ड विकसित करें,
      • जिला-वार अग्नि जोखिम ऑडिट अनिवार्य करें और डेटा सार्वजनिक करें,
      • और सभी भवनों को 12 महीनों के भीतर NBC पार्ट-4 मानकों का पालन सुनिश्चित करवाएं।

    अन्य महत्वपूर्ण मांगें

    याचिकाकर्ता ने यह भी आग्रह किया है कि:

    • NDMA और फायर सर्विसेज़ के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग गठित किया जाए और लापरवाही के मामलों में दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जाए।
    • देशभर में त्रासदियों से जुड़े मामलों—विशेषकर 3 वर्ष से अधिक पुराने मामलों—के त्वरित निपटारे के लिए राष्ट्रीय विशेष पीठ या ट्रिब्यूनल बनाया जाए।
    • आपदा-संबंधी मौतों के लिए एक समान राष्ट्रीय मुआवजा तंत्र लागू किया जाए, जिससे सभी नागरिकों को समान सुरक्षा और गरिमा मिल सके।
    • विद्युत मंत्रालय, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और राज्य DISCOMs को त्रैमासिक सुरक्षा ऑडिट, सार्वजनिक अलर्ट सिस्टम और सुदृढ़ मेंटेनेंस मानकों के पालन का निर्देश दिया जाए, साथ ही बिजली-संबंधी हादसों में तत्काल मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।

    सुनवाई के बाद खंडपीठ ने केंद्र सरकार, राज्यों और संबंधित प्राधिकारियों को नोटिस जारी कर मामले पर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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