'हिंसा भड़काने का कोई आरोप नहीं': AAP के विरोध प्रदर्शन से जुड़े 2020 के दंगा मामले में पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
Shahadat
22 July 2026 10:10 AM IST

पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा (AAP) के खिलाफ दंगे के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि किसी बेकाबू भीड़ में सिर्फ़ मौजूद रहने से ही 'साझा इरादा' (common intention) नहीं माना जा सकता, जिससे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147/148 लागू हो सके।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा कोई आरोप नहीं है कि अरोड़ा ने हिंसा भड़काई थी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच चंडीगढ़ प्रशासन की उस चुनौती पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसने पंजाब के सीएम भगवंत मान, अमन अरोड़ा और अन्य AAP नेताओं के खिलाफ दंगे का मामला रद्द किया।
यह मामला 2020 में बिजली की दरें बढ़ने के खिलाफ AAP नेताओं द्वारा निकाले गए विरोध मार्च को लेकर दर्ज किया गया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि AAP नेताओं के खिलाफ प्रथम दृष्टया (prima facie) कोई मामला नहीं बनता है और IPC के तहत कथित अपराध साबित नहीं होते हैं। कोर्ट ने FIR और IPC की धारा 147 (दंगा), 149 (गैर-कानूनी सभा), 332 (सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाना) और 353 (हमला) के तहत दायर चार्जशीट रद्द की।
अमन अरोड़ा (और 5 अन्य) के खिलाफ मामला रद्द करने के फैसले को चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा चुनौती दिए जाने पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बागची ने कहा,
"मिस्टर राजू, कई तरह के मामले होते हैं। हम समझ रहे हैं कि आप क्या कह रहे हैं। संज्ञान लेने वाले आदेश में [धाराएं] 147 और 148 जोड़ी गईं... इसमें बहुत ज़्यादा भागीदारी नहीं है... लेकिन बहुत ज़्यादा भागीदारी ज़रूरी भी नहीं है... हालांकि, किसी बेकाबू भीड़ में सिर्फ़ मौजूद रहने से ही 'साझा इरादा' नहीं माना जा सकता। 147, 148 बहुत गंभीर मामला है, क्योंकि इसकी सीमाएं कहीं तक भी बढ़ाई जा सकती हैं। इसलिए जब चार्जशीट में ये अपराध जोड़े जाते हैं तो हमें थोड़ा सावधान रहने की ज़रूरत है।"
जज ने आगे कहा,
"ऐसा कोई आरोप नहीं है कि उन्होंने हिंसा भड़काई थी... फिर आप कहते हैं कि वह एक राजनीतिक दल के सदस्य हैं, इसलिए हम मान लेंगे कि..."
UT की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने तर्क दिया कि AAP नेता भीड़ में मौजूद थे और सबसे गंभीर मामला उन पर लागू होता है।
उन्होंने कहा,
"यह सिर्फ़ मौजूदगी का मामला नहीं है... उकसाने का काम भी हुआ था... यह ट्रायल का मामला है, ज़मानत का नहीं... प्रथम दृष्टया सबूत मौजूद हैं।"
आखिरकार, बेंच ने इस मामले को 30 जुलाई के लिए लिस्ट किया। इसके साथ ही सीएम भगवंत मान के मामले में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली UT की याचिका पर भी सुनवाई होगी। उस मामले में CJI की अगुवाई वाली बेंच ने हाल ही में कहा था कि वह चंडीगढ़ प्रशासन की याचिका पर विचार करने के पक्ष में नहीं है।
CJI ने कहा,
"लोकतंत्र में हर कोई नारेबाज़ी करता है।"
Case Title: U.T. CHANDIGARH v. AMAN ARORA, Diary No. 40158-2026


