ओपन कट-ऑफ से अधिक अंक पाने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार ओपन श्रेणी की नियुक्ति के हकदार: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
5 Jan 2026 10:12 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरक्षित श्रेणी से संबंधित वे अभ्यर्थी, जो जनरल/ओपन कैटेगरी की कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करते हैं और किसी विशेष रियायत का लाभ नहीं लेते, उन्हें उनकी आरक्षित श्रेणी तक सीमित नहीं किया जा सकता। ऐसे उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्टिंग के चरण पर भी ओपन कैटेगरी में शामिल किया जाना अनिवार्य है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने राजस्थान हाई कोर्ट प्रशासन और रजिस्ट्रार की अपीलों को खारिज करते हुए 18 सितंबर 2023 के डिवीजन बेंच के निर्णय को कायम रखा।
भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा विवाद
यह मामला अगस्त 2022 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था, जिसमें राजस्थान हाई कोर्ट, अधीनस्थ न्यायालयों और संबद्ध संस्थानों में जूनियर जुडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II के 2,756 पदों पर नियुक्ति की जानी थी। चयन में 300 अंकों की लिखित परीक्षा और 100 अंकों का टाइपिंग टेस्ट शामिल था।
नियमों के अनुसार, प्रत्येक श्रेणी में रिक्तियों के पाँच गुना अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के आधार पर टाइपिंग टेस्ट के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाना था।
मई 2023 में परिणाम घोषित होने के बाद यह स्थिति सामने आई कि SC, OBC, MBC और EWS जैसी कई आरक्षित श्रेणियों की कट-ऑफ, जनरल कैटेगरी से अधिक थी। परिणामस्वरूप, कुछ आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने जनरल कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए थे, मगर अपनी श्रेणी की कट-ऑफ से कम थे, उन्हें शॉर्टलिस्टिंग से बाहर कर दिया गया। इस पर प्रभावित उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट की व्यवस्था
राजस्थान हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा कि—
शॉर्टलिस्टिंग भले ही श्रेणी-वार हो,
लेकिन मेरिट के आधार पर जनरल/ओपन सूची पहले तैयार की जाएगी
आरक्षित वर्ग के वे उम्मीदवार, जो जनरल कट-ऑफ से ऊपर हैं, ओपन कैटेगरी में समायोजित माने जाएंगे
बाद में बनाई जाने वाली आरक्षित सूची में ऐसे उम्मीदवारों को दोबारा शामिल नहीं किया जाएगा
अदालत ने इंद्रा साहनी और आर.के. सबरवाल मामलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी उम्मीदवार को केवल उसकी जाति/वर्ग की पहचान के कारण ओपन प्रतिस्पर्धा से बाहर नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की पुष्टि
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की इस व्याख्या से सहमति जताते हुए कहा कि—
“ओपन या जनरल कैटेगरी का अर्थ है — ऐसी सीटें जो सभी के लिए खुली हों और किसी भी जाति/वर्ग/लिंग के लिए आरक्षित न हों।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी अगले चयन-स्तर पर भी समान मेरिट बनाए रखता है, तो उसे ओपन कैटेगरी का उम्मीदवार ही माना जाएगा।
इसी आधार पर अपीलों को खारिज कर दिया गया।

