'जमानत याचिका में जांच आयोग कैसे गठित हो सकता है?' सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
Praveen Mishra
28 Jan 2026 11:23 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (28 जनवरी) को उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ द्वारा पारित अग्रिम जमानत (anticipatory bail) आदेश को चुनौती दी गई है। उक्त आदेश में हाईकोर्ट ने आरोपों की जांच के लिए एक जांच आयोग (Enquiry Commission) गठित करने का निर्देश दिया था।
यह मामला जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजनिया की खंडपीठ के समक्ष आया। पीठ ने उस आदेश के उस हिस्से के संचालन पर अंतरिम रोक (stay) लगा दी, जिसमें हाईकोर्ट ने जांच आयोग के गठन का निर्देश दिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल पेश हुए।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ताओं को एक ट्रस्ट का ट्रस्टी बताया गया है और उन पर ₹1.75 करोड़ नकद तथा 17.5 किलोग्राम सोने के गबन (swindling) का आरोप है।
15 दिसंबर 2025 को पारित आदेश में मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने कहा था:
“यह न्यायालय एक आयोग नियुक्त कर जांच करना चाहता है। सभी पक्षों से परामर्श के बाद, यह न्यायालय श्री राजराजेश्वरन (चार्टर्ड अकाउंटेंट) को खातों की जांच के लिए तथा माननीय श्री न्यायमूर्ति वी. शिवगणनम (सेवानिवृत्त) को जज-कमीश्नर नियुक्त करता है…”
हाईकोर्ट का उद्देश्य यह जांच करना था कि क्या ट्रस्टियों ने ट्रस्ट की भूमि को बेचा या अन्य वित्तीय अनियमितताएँ कीं।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
अग्रिम जमानत आदेश का अवलोकन करते हुए जस्टिस संदीप मेहता ने तीखी टिप्पणी की:
“हाईकोर्ट ने इस आदेश के जरिए जांच अधिकारी (IO) के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है। जमानत आवेदन में यह कैसे संभव है? क्या हाईकोर्ट के पास जमानत रोस्टर में पर्यवेक्षणीय (supervisory) अधिकार था? यह क्या है—जमानत मामले में जांच आयोग गठित करना? क्या यह किसी पक्ष की प्रार्थना थी?”
प्रतिवादी की ओर से एक अधिवक्ता ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने यह आदेश पक्षकारों की सहमति से पारित किया था।
इस पर जस्टिस मेहता ने कहा कि परामर्श (consultation) और सहमति (consent) में अंतर होता है।
उन्होंने कहा:
“भले ही पक्षों से परामर्श किया गया हो, परामर्श सहमति के बराबर नहीं होता। किसी भी स्थिति में यह आदेश पूरी तरह से अवैध है।”
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
“याचिकाकर्ता हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका पर विचार करते हुए जांच आयोग गठित करने के निर्देशों से आहत है। याचिकाकर्ता को आशंका है कि ऐसे आयोग का गठन उसके लिए प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। नोटिस जारी किया जाए। इस बीच, जहां तक जांच आयोग के गठन से संबंधित आदेश का प्रश्न है, उसके प्रभाव और संचालन पर रोक लगाई जाती है।”
अदालत ने मामले में नोटिस जारी कर दिया है और आगे की सुनवाई के लिए इसे सूचीबद्ध किया जाएगा।

