बेलडांगा हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने NIA जांच पर रोक लगाने से किया इनकार, कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से मना

Praveen Mishra

16 March 2026 4:37 PM IST

  • बेलडांगा हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने NIA जांच पर रोक लगाने से किया इनकार, कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से मना

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा हिंसा मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसमें एनआईए की जांच पर रोक लगाने से इनकार किया गया था।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। अदालत ने यह भी कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है और हाईकोर्ट को अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुनवाई जारी रखने के लिए कहा।

    यह मामला जनवरी 2026 में मुर्शिदाबाद जिले में हुई हिंसा से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोग डीजल और अन्य ज्वलनशील पदार्थ लेकर दुकानों और वाहनों में आग लगाने की मंशा से पहुंचे थे।

    पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंद्योपाध्याय ने दलील दी कि केस से संबंधित सामग्री एनआईए को सौंपने का आदेश सुप्रीम कोर्ट के 11 फरवरी के आदेश के विपरीत है। उस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से यह जांच करने को कहा था कि क्या उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लागू होता है या नहीं।

    हालांकि खंडपीठ ने कहा कि बिना केस डायरी और केस फाइल के एनआईए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं कर सकती।

    जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के 11 फरवरी के आदेश का उद्देश्य यह था कि हाईकोर्ट उपलब्ध सामग्री के आधार पर तय करे कि UAPA के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं। इसके लिए जांच से संबंधित सामग्री का देखना आवश्यक है।

    उन्होंने कहा, “हमें दोनों आदेशों में कोई टकराव नजर नहीं आता। राज्य पुलिस द्वारा एकत्रित सामग्री को देखकर यह तय करना कि UAPA लागू होता है या नहीं, वही है जो हम चाहते थे।”

    इस दौरान चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने भी कहा कि हाईकोर्ट का दृष्टिकोण काफी संतुलित है।

    इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका खारिज कर दी और हाईकोर्ट से मामले की सुनवाई तय तारीख पर करने का अनुरोध किया।

    मामले की पृष्ठभूमि

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर एनआईए को बेलडांगा पुलिस स्टेशन केस नंबर 51/2026 की जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया। इससे पहले 20 जनवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से यह जांचने को कहा था कि क्या इस मामले में एनआईए जांच शुरू की जा सकती है।

    पश्चिम बंगाल सरकार का तर्क था कि मामले में UAPA के तहत कोई अपराध दर्ज नहीं किया गया है, इसलिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के तहत एनआईए जांच का आधार नहीं बनता। राज्य ने कहा कि मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023, पश्चिम बंगाल मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर एक्ट, 1972 और प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट, 1984 के तहत दर्ज किया गया था।

    हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार एनआईए को यह रिपोर्ट देनी है कि क्या इस मामले में UAPA लागू होता है या नहीं। इसके लिए एजेंसी को केस डायरी और जांच से जुड़ी सामग्री की आवश्यकता होगी।

    हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट द्वारा केस डायरी एनआईए को सौंपने का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में है, इसलिए उस आदेश या एनआईए जांच पर रोक लगाने का कोई कारण नहीं है।

    इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के दृष्टिकोण से सहमति जताते हुए एनआईए जांच जारी रहने की अनुमति दी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story