आंध्र प्रदेश में OBC आरक्षण पर राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, 34% आरक्षण रद्द करने का हाईकोर्ट का फैसला बरकरार
Praveen Mishra
9 Oct 2026 5:43 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (9 अक्टूबर) को आंध्र प्रदेश सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य के ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 34% आरक्षण देने वाले दो सरकारी आदेशों को रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने बहुत ही उचित दृष्टिकोण अपनाया था। हाईकोर्ट ने 34% आरक्षण निर्धारित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा इस्तेमाल किए गए आंकड़ों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए थे।
यूनिफाइड फैमिली सर्वे के आंकड़ों पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आंकड़ों को अविश्वसनीय मानकर खारिज करने में गलती की है।
इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने सवाल किया कि हाईकोर्ट ने यह दर्ज करके क्या गलती की कि राज्य सरकार द्वारा इस्तेमाल किए गए यूनिफाइड फैमिली सर्वे के आंकड़े आरक्षण निर्धारित करने के लिए प्रासंगिक नहीं हैं।
जस्टिस दत्ता ने कहा कि राज्य सरकार को यह दिखाना होगा कि इन आंकड़ों पर भरोसा क्यों किया जा सकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि यूनिफाइड फैमिली सर्वे किस कानून के तहत कराया गया था।
पीठ ने हाईकोर्ट के दृष्टिकोण को उचित बताते हुए राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी।
50% आरक्षण की सीमा पार करने पर हाईकोर्ट ने रद्द किए थे सरकारी आदेश
यह मामला आंध्र प्रदेश सरकार के सरकारी आदेश (GO) संख्या 105 और 1065 से संबंधित था। इन आदेशों के जरिए ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग के लिए 34% आरक्षण का प्रावधान किया गया था।
हाईकोर्ट ने इन आदेशों को रद्द करते हुए कहा था कि इस आरक्षण के कारण कुल आरक्षण 50% की निर्धारित सीमा से अधिक हो रहा था। यह सीमा सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992) में निर्धारित की गई थी।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि 50% की सीमा से अधिक आरक्षण देने के फैसले को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त अनुभवजन्य आंकड़े (Empirical Data) उपलब्ध नहीं थे।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की याचिका खारिज किए जाने के बाद 34% OBC आरक्षण देने वाले इन सरकारी आदेशों को रद्द करने का हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा।

