NIA की स्वतः FIR दर्ज करने की शक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
Praveen Mishra
23 April 2026 12:42 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की उस शक्ति पर सवाल उठाए हैं, जिसके तहत वह धारा 6(5) के तहत स्वतः मामला दर्ज कर सकती है। अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधान के NIA किस आधार पर FIR दर्ज कर सकती है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। मामला केरल में 2022 में हुए एक हत्या कांड से जुड़ा है, जिसमें केरल पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
इसके बावजूद, केंद्र सरकार के आदेश पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने धारा 6(5) के तहत मामले की जांच अपने हाथ में लेकर नया केस दर्ज किया, जिसे आरोपियों ने चुनौती दी है।
कोर्ट के अहम सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा—
क्या NIA को स्वतः FIR दर्ज करने का अधिकार है?
क्या NIA को “पुलिस स्टेशन” माना जा सकता है?
बिना SHO के क्या जांच और चार्जशीट संभव है?
कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना पुलिस स्टेशन और विधिक अधिकार के FIR दर्ज करना गंभीर कानूनी सवाल खड़ा करता है।
याचिकाकर्ता का पक्ष
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि—
FIR दर्ज होना जांच के लिए जरूरी शर्त है
राज्य पुलिस द्वारा जांच पूरी होने के बाद NIA की एंट्री गलत है
यह राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन है
केंद्र का जवाब
केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि NIA “रेगुलर केस (RC)” के रूप में मामले दर्ज करती है और इसके लिए अधिसूचना जारी की गई है। हालांकि, अदालत ने इस संबंध में दस्तावेज पेश करने को कहा।
अदालत की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि यह पूरे देश से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है और इस पर स्पष्टता जरूरी है।
अगली कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने का समय देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।

