NEET-PG कट-ऑफ घटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, 'मरीजों की सुरक्षा से समझौता' का आरोप

Praveen Mishra

16 Jan 2026 3:25 PM IST

  • NEET-PG कट-ऑफ घटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, मरीजों की सुरक्षा से समझौता का आरोप

    NEET-PG 2025-26 के लिए योग्यता कट-ऑफ प्रतिशत में भारी कमी किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्ज़ामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज़ (NBEMS) द्वारा 13 जनवरी को जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसके तहत कट-ऑफ को असामान्य रूप से बहुत कम—यहां तक कि शून्य और नकारात्मक स्तर तक घटा दिया गया है।

    यह PIL समाजसेवी हरिशरण देवगन, न्यूरोसर्जन सौरव कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल (अध्यक्ष, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट) और डॉ. आकाश सोनी (सदस्य, वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन) द्वारा दायर की गई है।

    संवैधानिक चुनौती

    याचिकाकर्ताओं ने अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए कहा है कि PG मेडिकल शिक्षा के लिए योग्यता मानकों को इस तरह घटाना मनमाना है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन करता है।

    याचिका में तर्क दिया गया है कि मानकों में यह गिरावट मरीजों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पेशे की गरिमा के लिए गंभीर खतरा है।

    याचिका की प्रमुख दलीलें

    याचिका में कहा गया है:

    “चिकित्सा कोई सामान्य पेशा नहीं है; यह सीधे मानव जीवन, शारीरिक अखंडता और गरिमा से जुड़ा है। खाली सीटें भरने के नाम पर योग्यता को समाप्त करना, प्रतियोगी परीक्षा को मात्र एक प्रशासनिक औपचारिकता बना देता है और जीवन-संकट वाले क्षेत्र में पेशेवर मानकों के पतन को संस्थागत रूप देता है।”

    याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि PG स्तर पर योग्यता में कटौती करना राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के वैधानिक उद्देश्य के विपरीत है, जो चिकित्सा शिक्षा में गुणवत्ता और मानकों को बनाए रखने पर बल देता है।

    यह याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड नीमा के माध्यम से दाखिल की गई है, जिनकी सहायता अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत और अधिवक्ता आदर्श सिंह ने की।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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