ED की I-PAC रेड में रुकावट डालने के आरोपों को लेकर ममता बनर्जी के खिलाफ CBI जांच पर हो रहा विचार: सुप्रीम कोर्ट

Shahadat

18 Aug 2026 9:21 PM IST

  • ED की I-PAC रेड में रुकावट डालने के आरोपों को लेकर ममता बनर्जी के खिलाफ CBI जांच पर हो रहा विचार: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा इस साल जनवरी में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पॉलिटिकल कंसल्टेंट I-PAC पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड में कथित तौर पर रुकावट डालने की जांच को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंपने का इरादा जताया।

    कोर्ट ED और उसके अधिकारियों द्वारा दायर उस रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें ममता बनर्जी और कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR और जांच की मांग की गई, जिन्होंने कथित तौर पर उनके काम में मदद की।

    जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। शुरुआत में सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी (पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से) ने कहा कि चूंकि सरकार बदल गई है, इसलिए राज्य पुलिस जांच कर सकती है।

    इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि बाद में हुए बदलावों के कारण अब कुछ नहीं बचा है और मामले का निपटारा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोर्ट जांच को CBI को सौंपने की याचिकाकर्ता की मांग को मंज़ूरी देगा।

    जस्टिस मिश्रा ने कहा,

    "आप CBI को रेफर कर सकते हैं, हम आपको इसकी इजाज़त देंगे।"

    इसके बाद उन्होंने आदेश लिखवाना शुरू किया; हालांकि, वीसी के ज़रिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बीच में दखल दिया और आग्रह किया कि वे अपनी मांगों पर ज़ोर देना चाहते हैं कि बड़े मुद्दे पर फैसला किया जाए।

    उन्होंने कहा:

    "हम ऐसे किसी आरोप का सामना नहीं करना चाहते कि राज्य सरकार ने राजनीतिक कारणों से ऐसा किया। हम सही हैं या गलत, मैं चाहता हूं कि माई लॉर्ड्स इस पर फैसला करें। मैं उस जाल में नहीं फंसना चाहता कि सरकार में बदलाव के बाद राज्य ने इसे CBI को सौंप दिया।"

    एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि कोर्ट को यह तय करना चाहिए कि क्या CBI किसी मौजूदा मुख्यमंत्री की जांच कर सकती है अगर वह कोई अपराध करती है।

    उन्होंने कहा,

    "इसलिए मुद्दा यह है कि अगर कोई मौजूदा मुख्यमंत्री, जो गृह मंत्री भी हैं, कोई अपराध करती हैं तो क्या यह CBI द्वारा जांच किए जाने के लिए उपयुक्त मामला है या नहीं?"

    इसके बाद बेंच ने कहा कि वह आदेश के लिए मामला सुरक्षित रख रही है।

    हालांकि, गुरुस्वामी ने जवाब दिया कि अब तक की बहस केवल ED द्वारा दायर रिट याचिका की स्वीकार्यता (Maintainability) पर हुई, और मामले के गुण-दोष (Merits) पर चर्चा नहीं की गई। गुरुस्वामी की बात का खंडन करते हुए एसजी मेहता ने कहा कि मामले के गुण-दोष (Merits) और केस के चलने लायक होने (Maintainability), दोनों पर ही दलीलें दी गईं। उन्होंने आगे कहा कि पूर्व सीएम ने खुद माना है कि वह IPAC हेडक्वार्टर गई थीं, जिस पर कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर जांच के दौरान फैसला किया जाएगा।

    दोनों पक्षों की ओर से जवाबी दलीलें दी गईं और कोर्ट ने खुद कहा कि गुण-दोष के आधार पर अब "कुछ नहीं बचा है"। कोर्ट ने गुरुस्वामी को चेतावनी दी कि अगर वह गुण-दोष पर बहस जारी रखना चाहती हैं तो कोर्ट उनके खिलाफ आदेश दे सकता है।

    उन्होंने कहा:

    "गुण-दोष के आधार पर कुछ नहीं है; अगर आप गुण-दोष पर बहस करती हैं - यानी जिन चीज़ों को आप गुण-दोष मानती हैं - तो आपके लिए मुश्किल हो सकती है। अगर हम यह तय करते हैं कि केस चलने लायक है तो हम इसे CBI को भेज देंगे... जिस पल आप चाहेंगी कि हम गुण-दोष पर फैसला करें, हम कुछ ऐसा रिकॉर्ड करेंगे जिससे आपको नुकसान होगा। मैं आपको बता रहा हूं, इसके लिए तैयार रहें।"

    गुरुस्वामी ने कोर्ट से गुजारिश की कि पहले केस के चलने लायक होने (Maintainability) पर फैसला किया जाए, लेकिन कोर्ट ने कहा कि वह दोनों मुद्दों पर एक साथ फैसला करेगा।

    जस्टिस मिश्रा ने कहा,

    "हम नहीं चाहते कि पहले मेंटेनबिलिटी पर फैसला हो और फिर सुनवाई का दूसरा दौर चले। आप गुण-दोष पर अपनी बात पूरी करें। आप जिसे गुण-दोष मानती हैं, उसके लिए आप हमें पहले मेंटेनबिलिटी और फिर गुण-दोष पर फैसला करने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं। यह हमारा फैसला होगा।"

    इसके बावजूद, गुरुस्वामी ने गुण-दोष पर दलीलें दीं। उन्होंने कुछ फैसलों का हवाला दिया, जिनमें 'सकीरी वासु बनाम यूपी राज्य (2007)' का मामला भी शामिल था। उन्होंने कहा कि कानून साफ ​​है कि अगर पुलिस FIR दर्ज करने या ठीक से जांच करने में नाकाम रहती है तो पीड़ित व्यक्ति को CrPC की धारा 156(3) के तहत ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास जाना चाहिए।

    गुरुस्वामी, जिन्होंने दोपहर के बाकी सत्र में बहस की, ने बेंच को बताया कि सीनियर वकील कपिल सिब्बल और श्याम दीवान भी इन मुद्दों पर कोर्ट के सामने अपनी बात रखेंगे।

    इस मामले की सुनवाई 2 सितंबर को जारी रहेगी।

    Case Detail: DIRECTORATE OF ENFORCEMENT AND ANR. v. THE STATE OF WEST BENGAL AND ORS. | W.P.(Crl.) No. 16/2026

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