मुकुल रॉय की विधानसभा की सदस्यता से अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई

Praveen Mishra

16 Jan 2026 1:50 PM IST

  • मुकुल रॉय की विधानसभा की सदस्यता से अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें मुकुल रॉय को दलबदल कानून के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया गया था।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश मुकुल रॉय के पुत्र शुभ्रांशु रॉय द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी करते हुए पारित किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट के फैसले के प्रभाव को अगली सुनवाई तक स्थगित (abeyance) रखा जाएगा।

    मामले की पृष्ठभूमि

    मुकुल रॉय ने 2021 के विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर नॉर्थ सीट से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन चुनाव के बाद उनके तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल होने का आरोप लगाया गया। इसके आधार पर भाजपा के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और विधायक अंबिका रॉय ने उनके खिलाफ दलबदल याचिकाएं दाखिल की थीं।

    विधानसभा अध्यक्ष ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसके बाद सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने अध्यक्ष के फैसले को पलटते हुए मुकुल रॉय को अयोग्य घोषित कर दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट में दलीलें

    मुकुल रॉय की ओर से एडवोकेट प्रीतिका द्विवेदी ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने सीमित न्यायिक समीक्षा की सीमा का उल्लंघन करते हुए सीधे विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया, जो उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने यह भी बताया कि मुकुल रॉय की तबीयत खराब होने के कारण उनके बेटे ने याचिका दायर की है।

    याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने दलबदल के आरोपों को खारिज करते हुए यह पाया था कि सोशल मीडिया पोस्ट्स को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के अनुरूप प्रमाणित नहीं किया गया था। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने यह कहते हुए अध्यक्ष का निर्णय पलट दिया कि दसवीं अनुसूची (anti-defection law) की कार्यवाही में धारा 65B का सख्त पालन आवश्यक नहीं है।

    विरोधी पक्ष की दलील

    वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो सुवेंदु अधिकारी और अंबिका रॉय की ओर से पेश हुए, ने कहा कि मुकुल रॉय ने भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद खुले तौर पर दूसरी पार्टी जॉइन कर ली, जो स्पष्ट रूप से दलबदल है। उन्होंने यह आपत्ति भी उठाई कि याचिका मुकुल रॉय के बेटे द्वारा दायर की गई है।

    हालांकि, खंडपीठ ने लोकस स्टैंडी (याचिका दायर करने के अधिकार) संबंधी आपत्ति को ज्यादा महत्व नहीं दिया।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा:

    “यदि वह गंभीर स्थिति में हैं, तो परिवार का कोई सदस्य याचिका क्यों नहीं दायर कर सकता? उन्हें स्वयं भी प्रतिवादी बनाया गया है।”

    धारा 65B पर कोर्ट की टिप्पणी

    जस्टिस बागची ने हाईकोर्ट की इस टिप्पणी पर सवाल उठाया कि दलबदल मामलों में धारा 65B लागू नहीं होगी। उन्होंने कहा कि धारा 65B पर सुप्रीम कोर्ट का प्रमुख फैसला 'अर्जुन पंडित्राव खोतकर बनाम कैलाश गोरंट्याल' एक चुनाव याचिका में ही दिया गया था।

    “धारा 65B को दलबदल मामलों में शिथिल करना न्यायिक मिसाल के साथ अन्याय होगा। केवल 'नॉन-ट्रैवर्स' के आधार पर किसी को अयोग्य ठहराया जा सकता है?” – जस्टिस बागची

    चीफ़ जस्टिस ने भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की प्रामाणिकता साबित करना आवश्यक है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब AI-जनित वीडियो भी मौजूद हैं।

    फैसले पर रोक

    विरोधी पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक का विरोध किया, लेकिन पीठ ने परिणामों की गंभीरता को देखते हुए फैसले पर रोक लगाने का आदेश दिया।

    चीफ़ जस्टिस ने यह भी ध्यान दिलाया कि विधानसभा का कार्यकाल चार महीने में समाप्त हो रहा है।

    उन्होंने कहा:

    “यदि वह फिर से चुनाव लड़ते हैं, तो आप आवेदन दाखिल करें, हम देखेंगे कि क्या किया जाना है।”

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