किसानों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस: MSP को वास्तविक खेती लागत के आधार पर तय करने की मांग
Praveen Mishra
13 April 2026 1:06 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करते समय खेती की वास्तविक लागत यानी C2 को शामिल करने की मांग की गई है।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने एडवोकेट प्रशांत भूषण की दलीलें सुनीं। उन्होंने कहा कि देशभर के किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और कई बार MSP उनकी वास्तविक लागत से भी कम तय होता है। उन्होंने यह भी बताया कि MSP पर प्रभावी खरीद मुख्य रूप से गेहूं और चावल तक सीमित है, जबकि अन्य फसलों के किसान भारी नुकसान झेलते हैं।
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि C2 लागत में सभी प्रकार के खर्च शामिल होते हैं, जैसे बीज, खाद, श्रम, परिवार के श्रम का मूल्य, भूमि का किराया और पूंजी पर ब्याज। इसके विपरीत, वर्तमान व्यवस्था में MSP अक्सर A2+FL (प्रत्यक्ष खर्च + पारिवारिक श्रम) के आधार पर तय किया जाता है, जिससे भूमि और पूंजी जैसी महत्वपूर्ण लागतों को नजरअंदाज किया जाता है और किसानों को उनकी वास्तविक लागत नहीं मिल पाती।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि भूमि और पूंजी की लागत राज्यों के अनुसार अलग-अलग होती है, जिससे इस तरह की गणना में व्यावहारिक कठिनाइयां आ सकती हैं। वहीं, न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की कि याचिका में मांगी गई राहत से अदालत को आर्थिक नीति में हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। इस पर भुषण ने तर्क दिया कि कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसानों को उनकी लागत का उचित मूल्य मिले।
यह याचिका महाराष्ट्र के तीन किसानों द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि MSP को कम से कम C2 लागत के आधार पर तय किया जाए और सभी फसलों की प्रभावी खरीद सुनिश्चित की जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसानों को उनकी लागत का मूल्य नहीं मिलने के कारण वे आर्थिक संकट में हैं और आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं।

