सुप्रीम कोर्ट का मेरठ में 44 अवैध संपत्तियां सील करने का आदेश, ध्वस्तीकरण रोकने पर अधिकारी को लगाई फटकार

Praveen Mishra

8 April 2026 4:30 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट का मेरठ में 44 अवैध संपत्तियां सील करने का आदेश, ध्वस्तीकरण रोकने पर अधिकारी को लगाई फटकार

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) को उत्तर प्रदेश के मेरठ में 44 संपत्तियों को तुरंत सील करने का आदेश दिया, जहां रिहायशी प्लॉट्स को अवैध रूप से दुकानों, स्कूलों और अस्पतालों में बदल दिया गया था। इन इमारतों में न तो स्वीकृत नक्शे थे और न ही फायर सेफ्टी की बुनियादी व्यवस्था।

    जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच इस मामले में अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने पूर्व मेरठ मंडल आयुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई, जो व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हुए थे।

    कोर्ट ने पूछा कि उन्होंने किस अधिकार से पहले दिए गए न्यायिक आदेशों को नजरअंदाज करते हुए 27 अक्टूबर 2025 को यह आदेश दिया कि सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में “फिलहाल” दुकानों को नहीं तोड़ा जाएगा। आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने यह फैसला “जनता के विरोध” (public hue and cry) के कारण लिया था।

    इस पर जस्टिस पारदीवाला ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,

    “क्या आप अतिक्रमणकारियों के दबाव में आएंगे या कानून के शासन का पालन करेंगे? आप एक लोक सेवक हैं और आपको कानून का पालन करना चाहिए।”

    कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह आचरण “अदालत के आदेशों की खुली अवहेलना” है और इसे बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    बेंच ने यह भी कहा कि ये सभी प्लॉट मूल रूप से रिहायशी थे, लेकिन बिना किसी अनुमति और नक्शे के इन्हें व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया गया।

    कोर्ट विशेष रूप से इस बात से चिंतित दिखा कि इन 44 अवैध इमारतों में 5-6 स्कूल और अस्पताल भी चल रहे हैं, जहां छोटे बच्चे पढ़ते हैं और मरीज इलाज कराते हैं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि इन इमारतों को बिजली कनेक्शन और संचालन की अनुमति कैसे मिली, और क्या इनमें फायर सेफ्टी की कोई व्यवस्था है।

    कोर्ट ने यह भी पूछा कि बैंकों ने इन अवैध इमारतों में किराये पर जगह लेने से पहले उनकी वैधता की जांच क्यों नहीं की।

    अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो उसके लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

    कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन अवैध इमारतों में चल रहे स्कूलों और अस्पतालों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए। मरीजों और छात्रों के पुनर्वास की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

    साथ ही, पूर्व आयुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद को निर्देश दिया गया कि वे 27 अक्टूबर 2025 के आदेश को लेकर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें।

    इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

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