कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर फैसला लेने को एमपी सरकार से कहा
Praveen Mishra
19 Jan 2026 3:00 PM IST

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह मंत्री विजय शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में अभियोजन की स्वीकृति (Sanction to Prosecute) पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय ले।
चीफ जस्टिस सुर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस बागची की खंडपीठ ने कहा कि न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) अपनी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर चुका है, लेकिन राज्य सरकार की स्वीकृति का इंतज़ार है, जो भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (सांप्रदायिक वैमनस्य और घृणा को बढ़ावा देना) के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए आवश्यक है।
खंडपीठ ने यह भी नोट किया कि SIT रिपोर्ट में अन्य कथित आपत्तिजनक बयानों का भी उल्लेख है। अदालत ने SIT से निर्देश दिया कि वह ऐसे मामलों में प्रस्तावित कार्रवाई पर एक अलग रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद, विजय शाह ने भारतीय सेना की ओर से मीडिया को ब्रीफिंग देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की थीं। इसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने उनके बयानों की मौखिक रूप से निंदा करते हुए मामले की जांच के लिए SIT गठित की और गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक भी लगा दी।
आज सुनवाई के दौरान, शाह की ओर से सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने दलील दी कि शाह ने माफी मांग ली है और जांच में सहयोग कर रहे हैं। हालांकि, पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर कोई माफी दाखिल नहीं है।
चीफ जस्टिस ने कहा, “अब माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है… पहले भी हमने यह टिप्पणी की थी कि किस तरह की माफी दी गई है।” इससे पहले अदालत ने शाह की सार्वजनिक माफी को “कानूनी जिम्मेदारी से बचने के लिए 'मगरमच्छ के आंसू'” बताते हुए खारिज किया था। बाद की एक सुनवाई में अदालत ने उनकी कथित “ऑनलाइन माफी” पर भी असंतोष जताया था।
आरोप है कि शाह ने एक सार्वजनिक सभा में कहा था कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश ने आतंकियों से बदला लेने के लिए “आतंकियों की बहन” को उन्हें नष्ट करने के लिए

