CJI पर फेंके पेपर, गाली-गलौज के साथ किया हंगामा: सुप्रीम कोर्ट ने वकील के खिलाफ एक्शन लेने से किया इनकार

Shahadat

11 July 2026 10:13 AM IST

  • CJI पर फेंके पेपर, गाली-गलौज के साथ किया हंगामा: सुप्रीम कोर्ट ने वकील के खिलाफ एक्शन लेने से किया इनकार

    शुक्रवार (10 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशनर की अपील पर सुनवाई के दौरान अजीब नज़ारे देखने को मिले। पिटीशनर ने बदतमीज़ी की, कोर्टरूम में केस के पेपर फेंके और चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) के खिलाफ़ गंदी भाषा का इस्तेमाल किया।

    जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पार्शियल कोर्ट वर्किंग डेज़ बेंच के सामने प्रबल प्रताप नामक व्यक्ति इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अपनी रिट पिटीशन खारिज किए जाने के खिलाफ़ खुद पेश हुए। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत अपनी एप्लीकेशन को प्राइवेट कंप्लेंट केस में बदलने के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

    जब मामले की सुनवाई के लिए बुलाया गया तो पिटीशनर ने बेंच से एक अजीब बात कही,

    "मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट, मैं आपको ACP विकास नगर, लखनऊ के खिलाफ़ FIR दर्ज करने का आदेश देने का आदेश देता हूँ।"

    जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा,

    "आप मुझे ऑर्डर दे रहे हैं? आप हमें ऑर्डर दे रहे हैं?"

    अचानक पिटीशनर ने बिना किसी उकसावे के कोर्ट रूम में केस के पेपर्स फेंक दिए और CJI के लिए गाली-गलौज की। उसे जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के सिक्योरिटी वालों ने पकड़ लिया और बाहर ले गए।

    पूरे मामले के दौरान बेंच शांत रही और इस घटना पर कोई जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने कॉज लिस्ट में बाकी केसों पर आगे की कार्रवाई की। इसके अलावा, बेंच ने पिटीशनर के खराब बर्ताव के लिए उसके खिलाफ कोई एक्शन लेने से खुद को रोक लिया।

    कोर्ट ने कहा,

    "...ऊपर बताए गए पिटीशनर की हालत को देखते हुए, और उसके खिलाफ कोई एक्शन लेने का कोई प्रपोजल नहीं है। जहां तक ​​इस केस के मेरिट का सवाल है, हमने रिकॉर्ड देखे हैं, हमें विवादित फैसले/ऑर्डर में दखल देने का कोई अच्छा आधार नहीं मिला।"

    बता दें, 6 अक्टूबर, 2025 को भी ऐसी ही घटना हुई थी, जब सुप्रीम कोर्ट में वकील ने कोर्ट की कार्रवाई के दौरान अपना जूता निकालकर पूर्व चीफ जस्टिस बी.आर. गवई पर फेंकने की कोशिश की थी। सिक्योरिटी वालों ने बीच-बचाव किया और उसे कोर्ट से बाहर निकाला। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उसका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने उसकी मेंबरशिप खत्म कर दी। बाद में CJI गवई ने ज़ोर देकर कहा कि आरोपी वकील के खिलाफ कोई एक्शन न लिया जाए।

    Cause Title: PRABAL PRATAP AND ANR. Versus THE STATE OF UTTAR PRADESH AND ORS., Diary No. 31367-2026

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