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सुप्रीम कोर्ट ने गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली रोकने के लिए दिल्ली पुलिस की याचिका पर नोटिस जारी किया

LiveLaw News Network
12 Jan 2021 12:45 PM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली रोकने के लिए दिल्ली पुलिस की याचिका पर नोटिस जारी किया
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस की तरफ से दायर उस आवेदन पर नोटिस जारी किया है, जिसमें किसानों द्वारा विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन करने के लिए गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के खिलाफ निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की गई है।

पीठ ने कहा कि वह किसान यूनियनों को नोटिस तामील होने के बाद सोमवार,18 जनवरी को इस आवेदन पर विचार करेगी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की पीठ मंगलवार को दिल्ली की सीमाओं के पास प्रदर्शनकारी किसानों को हटाने के लिए प्रार्थना करने वाली याचिकाओं के एक बैच के साथ-साथ तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं के बैच पर आदेश देने वाली थी।

मंगलवार को हुई सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे, प्रदर्शनकारियों को हटाने की मांग करने वाले एक याचिकाकर्ता की ओर से पीठ के समक्ष पेश हुए और दलील दी कि गणतंत्र दिवस की परेड ''बेदाग होनी चाहिए।'' इस पर सीजेआई ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने सोमवार की कार्यवाही के दौरान कहा था कि ट्रैक्टर रैली नहीं होगी।

हालांकि, साल्वे ने खंडपीठ को सूचित किया कि दवे आज की कार्यवाही के दौरान मौजूद नहीं थे और दिल्ली पुलिस ने इस रैली को रोकने के लिए आवेदन दायर किया है।

अटॉर्नी-जनरल केके वेणुगोपाल ने खंडपीठ को बताया कि ''गणतंत्र दिवस पर शहर में 1 लाख लोगों के विशाल समूह को प्रवेश देने का कोई सवाल पैदा नहीं होता है'', क्योंकि कोई नहीं जानता है कि वे कहां जाएंगे।

इसके जवाब में, सीजेआई ने एजी से कहा कि यह पुलिस की शक्तियों के भीतर है कि वह नियंत्रित करे और यह देखे कि प्रदर्शनकारी सशस्त्र हैं या नहीं।

एजी ने तब प्रस्तुत किया कि प्रदर्शनकारियों ने व्यक्त किया था कि एक ट्रैक्टर रैली गणतंत्र दिवस पर होगी, और परिणामस्वरूप तत्काल दिल्ली पुलिस ने इस रैली को रोकने के लिए एक आवेदन दायर किया है।

इसप्रकार,खंडपीठ ने इस मामले में नोटिस जारी कर दिया है और मामले को अगले सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया है।

अटॉर्नी जनरल ने पीठ को यह भी बताया कि खालिस्तानियों ने विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ की है। इस पर, पीठ ने एजी से कहा कि विरोध प्रदर्शनों में प्रतिबंधित संगठनों की कथित उपस्थिति पर कल एक हलफनामा दायर करें।

दिल्ली पुलिस द्वारा दायर आवेदन में कहा गया है कि सुरक्षा एजेंसियों के संज्ञान में आया है कि ''विरोध करने वाले व्यक्तियों/संगठनों के एक छोटे समूह ने गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर/ ट्रॉली/वाहन रैली करने की योजना बनाई है'' और यह रैली परेड को 'परेशान करने और बाधित करने' के साथ-साथ कानून और व्यवस्था की स्थिति भी बनाएगी, जिससे राष्ट्र को शर्मिंदा होना पड़ेगा।

यह कहते हुए कि विरोध करने का अधिकार पब्लिक ऑर्डर और पब्लिक इंटरेस्ट के अधीन है, आवेदन में कहा गया है कि इस अधिकार में ''देश को विश्व स्तर पर बदनाम करना'' शामिल नहीं हो सकता है। यह देखते हुए कि सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों और किसानों के विरोधों की संवैधानिकता से संबंधित मुद्दों को सीज कर लिया है,इस आवेदन में शीर्ष न्यायालय से रिपब्लिक डे पर इस तरह के विरोध मार्च को रोकने के लिए निषेधाज्ञा पारित करने की मांग की जा रही है।

''इसलिए, अनुरोध है कि यह माननीय न्यायालय किसी भी तरह के विरोध मार्च का संचालन करने के रोकने के लिए निषेधाज्ञा का आदेश पारित करें ताकि 26 जनवरी, 2021 को दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च, ट्रॉली मार्च, वाहन मार्च या किसी अन्य मोड के रूप में कोई विरोध मार्च न किया जा सकें।''

आवेदन में उन मार्गों को सूचीबद्ध किया गया है जो निरंतर विरोध के कारण पूरी तरह से अवरुद्ध हो गए हैं और गणतंत्र दिवस पर होने वाली इवेंट्स का कालक्रम भी प्रस्तुत किया गया है, जो 23 जनवरी को भव्य पूर्वाभ्यास से शुरू होंगे और 30 जनवरी को शहीद दिवस पर समाप्त होते हैं।

उपरोक्त के प्रकाश में, दिल्ली पुलिस ने प्रार्थना की है कि निषेधाज्ञा पारित किया जाए।

सुनवाई के अंत में, सीजेआई ने कहा कि अदालत अगले आदेश तक तीनों कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक का आदेश पारित करेगीः

-'किसान व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020'

-किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम, 2020

-आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020।

पीठ ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारी किसानों और सरकार के बीच बातचीत करने के लिए एक समिति बना रही है।

सीजेआई एसए बोबडे ने इस समिति के सदस्यों के तौर पर कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, बीकेयू और अखिल भारतीय समन्वय समिति के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, प्रमोद कुमार जोशी (निदेशक, दक्षिण एशिया अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति), अनिल घणावत (शेतकरी संगठन) के नामों का उल्लेख भी किया है। वहीं उम्मीद जताई है कि इस समिति के जरिए सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच गतिरोध का समाधान होगा। दिन के अंत तक न्यायालय द्वारा एक पूर्ण आदेश जारी किया जाएगा।

सुनवाई का पूर्ण अपडेट यहां उपलब्ध है

https://www.livelaw.in/top-stories/farm-laws-and-farmers-protest-live-updates-from-supreme-court-168294

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