पंचकूला ज़मीन आवंटन मामले में भूपिंदर हुड्डा को मिली क्लीन चिट के खिलाफ CBI की चुनौती पर नोटिस जारी

Shahadat

5 May 2026 9:58 AM IST

  • पंचकूला ज़मीन आवंटन मामले में भूपिंदर हुड्डा को मिली क्लीन चिट के खिलाफ CBI की चुनौती पर नोटिस जारी

    सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL)—जो कांग्रेस का अख़बार 'नेशनल हेराल्ड' प्रकाशित करता है—को पंचकूला में AJL को कथित तौर पर ज़मीन आवंटन के मामले में क्लीन चिट दी गई।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू CBI की ओर से जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच के सामने पेश हुए। बेंच ने नोटिस जारी किया, जिसका जवाब जुलाई तक देना है।

    25 फरवरी के आदेश में हाईकोर्ट के जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने माना था कि ज़मीन का दोबारा आवंटन वैध है। इसे न तो अवैध घोषित किया गया और न ही रद्द किया गया। कोर्ट ने कहा कि CBI ने खुद ही इस दोबारा आवंटन को अवैध करार दे दिया और सवाल उठाया कि कोई जाँच एजेंसी ऐसा कैसे कर सकती है।

    संक्षिप्त तथ्य

    CBI ने आरोप लगाया कि 1982 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) द्वारा पंचकूला में AJL को 'न लाभ न हानि' (No Profit No Loss) के आधार पर एक प्लॉट आवंटित किया गया। हालांकि, चूंकि 10 साल तक वहाँ कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ, इसलिए HUDA ने प्लॉट का कब्ज़ा वापस ले लिया।

    इसके अलावा, यह दावा किया गया कि वर्ष 2005 में हुड्डा (उस समय हरियाणा के मुख्यमंत्री) द्वारा सिफ़ारिश की गई थी कि वही प्लॉट AJL को मूल कीमत पर वापस दे दिया जाए। साथ ही आवंटन बहाल होने की तारीख तक का बकाया ब्याज भी लिया जाए।

    यह तर्क दिया गया कि AJL के पक्ष में सिफ़ारिश के बाद इसे HUDA प्राधिकरण की बैठक में रखा गया। प्राधिकरण ने इस पर कुछ आपत्तियां उठाई थीं, जिनमें कहा गया कि प्लॉट का दोबारा आवंटन या तो बाज़ार कीमत पर किया जाए, या फिर विज्ञापन के माध्यम से किया जाए और AJL को भी इसमें भाग लेने की अनुमति दी जाए। हालांकि, जब मीटिंग हुई तो अधिकारियों ने AJL को प्लॉट वापस देने के संबंध में कोई आपत्ति नहीं जताई। साथ ही संस्थागत प्लॉट के आवंटन को बहाल करने के उसके अनुरोध को 'अथॉरिटी' ने बिना किसी सदस्य की आपत्ति के मंज़ूर कर लिया।

    CBI ने यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपी व्यक्तियों हुड्डा, मिस्टर मोती लाल वोहरा (मृतक) और AJL ने आपस में साज़िश करके प्लॉट के दोबारा आवंटन में अपने सरकारी पद का दुरुपयोग किया, जिससे सरकारी खजाने को गलत तरीके से नुकसान पहुँचा और प्रतिवादियों को गलत तरीके से फ़ायदा हुआ।

    अप्रैल 2021 में स्पेशल कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 120-B (आपराधिक साज़िश में शामिल होना) और 420 (धोखाधड़ी), तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2) सहपठित धारा 13(1)(d) के तहत आरोप तय किए।

    Case Details: CENTRAL BUREAU OF INVESTIGATION v BHUPINDER SINGH HOODA AND ANR.|SLP(Crl) No.7634-7635/2026

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