मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया आपराधिक अवमानना ​​का नोटिस

Shahadat

1 May 2026 12:00 PM IST

  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया आपराधिक अवमानना ​​का नोटिस

    बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के अध्यक्ष, एडवोकेट धन्य कुमार जैन को आपराधिक अवमानना ​​का नोटिस जारी किया।

    BCI की रिट याचिका के अनुसार, धन्य कुमार जैन ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को शिकायत लिखी थी, जिसमें उन्होंने BCI के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज-जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय चुनाव समिति के खिलाफ झूठे आरोप लगाए।

    बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की राज्य बार काउंसिल के चुनाव लड़ने की पात्रता के संबंध में जैन ने अपने पत्र में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ भी कथित तौर पर टिप्पणियां की थीं। अन्य बातों के अलावा, उन्होंने समिति के प्रमुख के रूप में जस्टिस धूलिया की CJI द्वारा की गई नियुक्ति पर संदेह जताया था, CJI पर उनके प्रति दुर्भावना रखने का आरोप लगाया। साथ ही बार निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण के CJI पीठ के आदेश को "न्यायिक पद का दुरुपयोग" बताते हुए उस पर सवाल उठाया।

    इसके अलावा, जैन ने अपनी शिकायत में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर भी सवाल उठाया, जिसमें उसने दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज-जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया; जस्टिस वर्मा एक विवाद में तब घिर गए, जब आग लगने की एक घटना के बाद उनके आवास पर कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी मिली थी। शिकायत में दावा किया गया कि यह देश के लोकतंत्र के खिलाफ "देश की न्यायपालिका द्वारा किया गया जघन्य अपराध" है।

    इसी पृष्ठभूमि में, CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने अवमानना ​​नोटिस का आदेश पारित किया। यह आदेश सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्ण कुमार (BCI की ओर से) की दलीलें सुनने के बाद दिया गया। उन्होंने तर्क दिया कि जो कुछ हुआ वह "पूरी तरह से दुर्भाग्यपूर्ण" था और उस पर किसी न किसी तरह की कार्रवाई होनी चाहिए।

    जस्टिस बागची ने टिप्पणी की,

    "क्या वकीलों के नेता से इसी तरह के संयम की उम्मीद की जाती है?"

    खंडपीठ ने धन्य कुमार जैन को नोटिस जारी कर यह बताने को कहा—

    - उन पर 'अदालत की अवमानना ​​अधिनियम' के तहत आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए?

    - उनका बार लाइसेंस क्यों न निलंबित कर दिया जाए?

    - उन्हें बार एसोसिएशन के पदाधिकारी के पद से क्यों न हटा दिया जाए?

    हालांकि, BCI ने राज्य को यह निर्देश देने की प्रार्थना की थी कि वह धन्य कुमार जैन द्वारा की गई शिकायत पर कोई कार्रवाई न करे, लेकिन खंडपीठ ने इस संबंध में कोई एकतरफा (Ex-Parte) आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।

    CJI ने कहा,

    "उन्हें पेश होने दीजिए... हमें अब भी उम्मीद है कि कुछ बेहतर समझ काम आएगी। आखिर, वकील तो वकील ही होते हैं। लेकिन जब हमें लगता है कि समझदारी की कोई गुंजाइश ही नहीं है तो हमें यह भी पता है कि नासमझ लोगों से कैसे निपटना है।"

    Case Title: BAR COUNCIL OF INDIA Versus STATE OF MADHYA PRADESH AND ORS., W.P.(Crl.) No. 157/2026

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