सुप्रीम कोर्ट से राहत: छत्तीसगढ़ के कोर्ट कर्मचारी को एलएलबी तीसरे वर्ष की परीक्षा में बैठने की अंतरिम अनुमति
Praveen Mishra
21 April 2026 4:32 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के एक न्यायालय कर्मचारी को अंतरिम राहत देते हुए एलएलबी के तीसरे वर्ष की शेष परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दे दी है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।
पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता को सितंबर 2022 में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय में सहायक ग्रेड-III के रूप में तीन वर्ष की प्रोबेशन अवधि के लिए नियुक्त किया गया था। नियुक्ति की शर्तों के अनुसार, पहले वर्ष में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कार्यालय प्रमुख की अनुमति आवश्यक थी।
प्रोबेशन के दौरान याचिकाकर्ता को एलएलबी के पहले और दूसरे वर्ष की पढ़ाई के लिए अनुमति मिल गई थी। हालांकि, 6 अक्टूबर 2023 से लागू छत्तीसगढ़ जिला न्यायपालिका स्थापना (भर्ती एवं सेवा की शर्तें) कर्मचारी नियम, 2023 के नियम 11 के तहत कर्मचारियों को नियमित छात्र के रूप में परीक्षा देने पर रोक लगाई गई और केवल निजी या पत्राचार माध्यम से अध्ययन की अनुमति दी गई।
विवाद
जब याचिकाकर्ता ने तीसरे वर्ष की परीक्षा नियमित छात्र के रूप में देने की अनुमति मांगी, तो नियुक्ति प्राधिकारी ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां एकल पीठ ने उसे अनुमति दे दी। हालांकि, बाद में खंडपीठ ने इस आदेश को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को एलएलबी तीसरे वर्ष की शेष परीक्षाओं में बैठने दिया जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि जिस एक विषय की परीक्षा याचिकाकर्ता पहले ही मिस कर चुका है, उस पर बाद में अलग से आदेश पारित किया जाएगा।
निष्कर्ष
मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। यह मामला सरकारी सेवा नियमों और कर्मचारियों के शिक्षा के अधिकार के बीच संतुलन से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाता है, जिस पर अंतिम निर्णय आना बाकी है।

