रूस में फंसे 26 भारतीयों की सुरक्षित वापसी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

Praveen Mishra

10 April 2026 4:05 PM IST

  • रूस में फंसे 26 भारतीयों की सुरक्षित वापसी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रूस में कथित रूप से फंसे 26 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी से जुड़ी हैबियस कॉर्पस याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन भारतीयों को जबरन यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले में निर्देश लेने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों की ओर से लगातार निष्क्रियता बनी हुई है और फंसे हुए भारतीयों को जबरन युद्ध में भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम रूस में फंसे हैं और एक विदेशी देश के लिए यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने को मजबूर हैं।”

    याचिका, जो प्रभावित व्यक्तियों के परिजनों द्वारा दायर की गई है, में कहा गया है कि ये 26 भारतीय नागरिक टूरिस्ट, स्टूडेंट या अन्य वैध वीजा पर रूस गए थे। उन्हें नौकरी का झांसा देकर भर्ती एजेंटों के जरिए भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर लिए गए, आवाजाही पर रोक लगा दी गई और धमकियों के जरिए उन्हें रूसी सैन्य ढांचे में शामिल कर लिया गया।

    याचिका के अनुसार, परिवारों को आखिरी बार सितंबर से अक्टूबर 2025 के बीच उनसे संपर्क हुआ था। उस समय वे कुपियांस्क, सेलिडोवे, मकीव्का और चेल्याबिंस्क जैसे संघर्ष क्षेत्रों के आसपास तैनात बताए गए थे। इसके बाद कई मामलों में परिवारों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है और उनकी स्थिति, स्वास्थ्य या स्थान के बारे में कोई पुष्टि नहीं हो पाई है।

    याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय, मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास, गृह मंत्रालय और राज्य सरकारों को कई बार सूचना देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस स्थिति के कारण परिवारों को भारी मानसिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

    याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार विदेश मंत्रालय के माध्यम से तत्काल कूटनीतिक और दूतावास स्तर पर कदम उठाए, फंसे हुए भारतीयों का पता लगाए, उन्हें वियना कन्वेंशन के तहत काउंसलर एक्सेस दिलाए और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे। साथ ही परिवारों से संपर्क बहाल कराने, चिकित्सा सहायता और कानूनी मदद उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।

    इसके अतिरिक्त, याचिका में केंद्र सरकार से यह भी कहा गया है कि वह विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों से जुड़े मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया (SOP) का विवरण कोर्ट में पेश करे और अवैध भर्ती एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।

    फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की गई है।

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