गुरुग्राम ध्वस्तीकरण के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार, आज ही हाईकोर्ट जाने की दी अनुमति
Praveen Mishra
27 April 2026 12:29 PM IST

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को गुरुग्राम में चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ताओं को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आज ही हाईकोर्ट में मामले का त्वरित उल्लेख करने की अनुमति दी और मुख्य न्यायाधीश से इसे दोपहर 1 बजे या लंच के बाद सुनने का अनुरोध किया।
मामला चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन द्वारा उल्लेखित किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि बिना अनिवार्य कारण बताओ नोटिस जारी किए ही ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया गया है। इस पर सीजेआई ने टिप्पणी की कि यदि निर्माण अवैध हैं और हाईकोर्ट अपना संवैधानिक दायित्व निभा रहा है, तो सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए।
याचिका गुरुग्राम के सेक्टर-31 (लेन 635 से 937) के निवासियों द्वारा दायर की गई है, जिसमें 'स्टिल्ट + 4' (एस+4) निर्माण नीति पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के 2 अप्रैल 2026 के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस आदेश का गलत अर्थ निकालते हुए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान शुरू कर दिया, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
याचिका के अनुसार, 16 अप्रैल 2026 को जारी प्रशासनिक निर्देश के आधार पर सीमा दीवारों, रैंप और हरित क्षेत्रों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई, जबकि हाईकोर्ट ने केवल नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगाई थी, न कि किसी ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। निवासियों का कहना है कि लगभग 1500 परिवार, जो दशकों से वहां रह रहे हैं, बिना नोटिस और बिना सुनवाई के कार्रवाई का सामना कर रहे हैं, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रभावित निवासी मूल जनहित याचिका का हिस्सा नहीं थे, फिर भी उन्हें बिना सुने प्रभावित किया गया। साथ ही, प्रशासनिक कार्रवाई के लिए किसी स्पष्ट वैधानिक प्रावधान का उल्लेख नहीं किया गया और “अतिक्रमण” की परिभाषा भी स्पष्ट नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलीलें हाईकोर्ट के समक्ष रखने की बात कहते हुए याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

