BREAKING | असम पुलिस की FIR में पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम ज़मानत

Shahadat

1 May 2026 12:07 PM IST

  • BREAKING | असम पुलिस की FIR में पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम ज़मानत

    सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम पुलिस द्वारा दर्ज FIR के मामले में अग्रिम ज़मानत दी। यह FIR मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की शिकायत पर दर्ज की गई। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिंकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं।

    जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चांदुरकर की बेंच ने गुरुवार को खेड़ा की याचिका पर फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। इस याचिका में खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम ज़मानत अर्ज़ी खारिज किए जाने के फ़ैसले को चुनौती दी थी।

    शुक्रवार सुबह जारी किए गए फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणी "रिकॉर्ड पर रखे गए सभी सबूतों की सही समझ पर आधारित नहीं है और गलत लगती है, खासकर आरोपी पर सबूत देने का बोझ डालने के मामले में।"

    कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोप-प्रत्यारोप पहली नज़र में "राजनीति से प्रेरित और आपसी रंजिश से प्रभावित लगते हैं, न कि ऐसी स्थिति दिखाते हैं, जिसमें हिरासत में लेकर पूछताछ की ज़रूरत हो। आरोपों की सच्चाई की जांच ट्रायल के दौरान की जा सकती है।"

    कोर्ट ने कहा,

    "व्यक्तिगत आज़ादी का अधिकार एक अनमोल मौलिक अधिकार है। इसे छीनने का कोई भी कदम बहुत ठोस आधार पर ही सही ठहराया जा सकता है, खासकर तब जब आस-पास के हालात से राजनीतिक दखल का इशारा मिलता हो।"

    बेंच ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने BNS की धारा 339 के तहत अपराध के बारे में जो टिप्पणियां कीं, वे गलत हैं, क्योंकि FIR में ऐसे कोई आरोप नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट सिर्फ़ एडवोकेट जनरल के बयान के आधार पर ऐसी टिप्पणियां नहीं कर सकता।

    राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर इस मामले में खेड़ा को गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें अग्रिम ज़मानत पर रिहा कर दिया जाए। उन्हें जांच में सहयोग करने और ज़रूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया। उन्हें यह भी निर्देश दिया गया कि वे कोर्ट की पहले से अनुमति लिए बिना भारत छोड़कर न जाएं। उन पर वे सामान्य शर्तें भी लगाई गईं कि वे सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करें।

    फ़ैसले में कोर्ट ने कहा कि खेड़ा और मुख्यमंत्री के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला है। कोर्ट ने फ़ैसले में यह भी दर्ज किया कि राज्य के मुख्यमंत्री ने खेड़ा के खिलाफ़ कुछ "असंसदीय टिप्पणियां" कीं और उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दी। कोर्ट ने कहा कि सभी परिस्थितियों को देखते हुए, राहत दी जानी ज़रूरी है, ताकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को कोई खतरा न हो।

    कोर्ट ने कहा,

    "इस स्तर पर हम इस बात से अवगत हैं कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को हल्के में खतरे में नहीं डाला जा सकता। हालांकि, साथ ही हमारा यह भी मानना ​​है कि FIR में लगाए गए किसी भी आरोप के लिए जांच पूरी ईमानदारी से और पूरी तेज़ी से अपीलकर्ता के सहयोग से पूरी की जानी चाहिए।"

    कोर्ट ने आगे कहा,

    "ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए हमारी राय है कि अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी पर फ़ैसला करते समय निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में राज्य के हित और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति के व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के बीच एक सावधानी भरा संतुलन बनाया जाना चाहिए।"

    Case : Pawan Khera v. State of Assam

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