गाजियाबाद रेप-हत्या केस: 4 वर्षीय बच्ची के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SIT जांच के आदेश दिए, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

Praveen Mishra

24 April 2026 5:20 PM IST

  • गाजियाबाद रेप-हत्या केस: 4 वर्षीय बच्ची के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SIT जांच के आदेश दिए, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद में 4 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एक एसआईटी का गठन करें, जिसमें वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी शामिल हों और जो तत्काल जांच शुरू करे।

    कोर्ट ने निर्देश दिया कि एसआईटी पीड़िता के माता-पिता द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों, विशेषकर महत्वपूर्ण गवाहों की सुरक्षा और निजी अस्पतालों की भूमिका की जांच करे। साथ ही ट्रायल कोर्ट को एसआईटी की अनुपूरक रिपोर्ट आने तक कार्यवाही स्थगित रखने को कहा गया है और जांच यथाशीघ्र, अधिमानतः दो सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

    सुनवाई के दौरान पीड़िता के माता-पिता की ओर से सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने आरोप लगाया कि एक ओर पुलिस जांच पूरी होने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर बच्ची के पिता को धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए जबरन ले जाया गया और उन पर एफआईआर के अनुसार बयान दोहराने का दबाव डाला गया।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निजी अस्पतालों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि मुख्य आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और संज्ञान भी लिया जा चुका है।

    हालांकि, न्यायालय ने मामले की गंभीरता और पीड़ित परिवार की असंतुष्टि को देखते हुए एसआईटी से स्वतंत्र जांच कराने का निर्णय लिया। उल्लेखनीय है कि एक महीने के भीतर यह दूसरा मामला है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 4 वर्षीय बच्ची के साथ अपराध की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है; इससे पहले गुरुग्राम मामले में भी इसी प्रकार का कदम उठाया गया था।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story