सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा बलात्कार के लिए केवल 3 साल की सजा सुनाए जाने पर हैरानी जताई
Shahadat
13 Jan 2025 9:44 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस बात पर हैरानी जताई कि ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत बलात्कार के अपराध के लिए केवल तीन साल की सजा सुनाई, जबकि इस अपराध के लिए निर्धारित न्यूनतम सजा सात साल की कैद थी (2013 के संशोधन से पहले)।
कोर्ट ने यह भी देखा कि गुजरात हाईकोर्ट ने दोषी की सजा के खिलाफ अपील और सजा बढ़ाने की राज्य की अपील खारिज करते समय इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा,
हालांकि हाईकोर्ट को ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई गलती का अहसास था, लेकिन उसने इसे सुधारने के लिए कुछ नहीं किया।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने टिप्पणी की:
"हम यह समझने में विफल हैं कि भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 376 के तहत दंडनीय बलात्कार के अपराध के लिए ट्रायल कोर्ट ने तीन साल के कठोर कारावास की सजा कैसे लगाई। यहां तक कि हाईकोर्ट ने भी अपीलकर्ताओं द्वारा दायर आपराधिक अपील खारिज करते हुए इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया कि आईपीसी की धारा 376 के तहत दंडनीय बलात्कार के अपराध के लिए ट्रायल कोर्ट ने तीन साल की सजा कैसे लगाई, जबकि न्यूनतम सजा सात साल है।"
न्यायालय ने दोषसिद्धि के खिलाफ दोषी की अपील पर विचार करते हुए ये टिप्पणियां कीं। जब न्यायालय ने गुजरात राज्य की सरकारी वकील स्वाति घिल्डियाल को सजा में विसंगति के बारे में बताया तो उन्होंने सहमति जताई कि यह ट्रायल कोर्ट की ओर से एक "गंभीर त्रुटि" थी। लेकिन उन्हें यह भी समझ में नहीं आया कि इस स्थिति को कैसे सुधारा जाए, जबकि राज्य ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस पहलू की "बारीकी से" जांच करना चाहता है तथा मामले की सुनवाई 23 जनवरी, 2025 तक स्थगित कर दी।

