30% महिला आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट ने ज़िला जजों को बार एसोसिएशनों की ECs में सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया

Shahadat

14 March 2026 9:45 AM IST

  • 30% महिला आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट ने ज़िला जजों को बार एसोसिएशनों की ECs में सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया

    सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के ज़िला जजों को अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले बार एसोसिएशनों की एग्जीक्यूटिव कमेटियों/गवर्निंग बॉडीज़ में महिला सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया, ताकि उनमें 30 प्रतिशत महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मानदंड पूरा हो सके।

    कोर्ट ने ज़िला जजों को यह अधिकार दिया कि यदि किसी विशेष अधिकार क्षेत्र में पर्याप्त महिला सदस्य उपलब्ध हैं, लेकिन वे किसी कारणवश एग्जीक्यूटिव कमेटी/गवर्निंग बॉडी के चुनाव नहीं लड़ सकीं, तो वे उन्हें नॉमिनेट कर सकते हैं।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह आदेश पारित किया।

    इससे पहले, कोर्ट ने सभी हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार जनरलों को निर्देश दिया था कि वे बार एसोसिएशनों में पदाधिकारी या एग्जीक्यूटिव सदस्य के तौर पर महिला वकीलों के 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की अपनी अनिवार्यता का पालन सुनिश्चित करें और उसकी रिपोर्ट दें।

    सीनियर एडवोकेट जयना कोठारी ने बताया कि जहां कुछ हाई कोर्टों ने विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की, वहीं कुछ अन्य ने 'अधूरी' रिपोर्टें दाखिल कीं। यह भी बताया गया कि कुछ बार एसोसिएशन 30% प्रतिनिधित्व के मानदंड को पूरा नहीं कर रहे थे।

    इस पृष्ठभूमि में कोर्ट ने निर्देश दिया,

    "जहां पर्याप्त महिला सदस्य उपलब्ध हैं और किसी कारणवश वे चुनाव नहीं लड़ सकीं, वहां ज़िला जजों को अपने अधिकार क्षेत्र के संबंधित बार एसोसिएशनों की एग्जीक्यूटिव कमेटी में महिला सदस्यों को नॉमिनेट करने और हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार जनरलों को अनुपालन रिपोर्ट भेजने का अधिकार दिया जाता है। इसके बाद रजिस्ट्रार जनरल [डेटा] को संकलित करके इस कोर्ट को भेजेंगे।"

    कोर्ट ने आगे यह भी पाया कि केवल 11 हाई कोर्टों ने ही अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की हैं, जिनमें निम्नलिखित मुद्दों पर जवाब दिया गया:

    - क्या उनके अधिकार क्षेत्र के बार एसोसिएशनों की एग्जीक्यूटिव बॉडी में महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है?

    - क्या बार एसोसिएशनों ने अपने नियमों में महिलाओं के लिए 30% प्रतिनिधित्व की अनिवार्यता को शामिल किया?

    - जिन बार एसोसिएशनों में कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं हो सका, वहाँ क्या सुधारात्मक उपाय किए गए?

    आदेश में यह भी दर्ज किया गया कि प्रतिनिधित्व का यह लाभ विभिन्न बार एसोसिएशनों - जैसे टैक्स, RERA, DRT, NGT आदि - तक नहीं पहुँच पाया है। अंत में, कोर्ट ने शेष 14 हाई कोर्टों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके संबंधित अधिकार क्षेत्र के सभी बार एसोसिएशन अपनी गवर्निंग बॉडीज़/एग्जीक्यूटिव बॉडीज़ के चुनावों में महिला सदस्यों को 30% प्रतिनिधित्व प्रदान करें।

    मामलों के इस मौजूदा बैच में मुख्य मुद्दा हर बार एसोसिएशन—जिसमें तालुका/ज़िला/टैक्स/RERA बार के साथ-साथ हाई कोर्ट बार एसोसिएशन भी शामिल हैं—में महिला वकीलों को पदाधिकारी/कार्यकारी सदस्य के तौर पर 30% प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने से जुड़ा है। कोर्ट के दखल और बार के सदस्यों के सहयोग से, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और कुछ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के मामलों में इस तरह का प्रतिनिधित्व पहले ही सुनिश्चित किया जा चुका है।

    Case Title: DEEKSHA N AMRUTHESH Versus STATE OF KARNATAKA AND ORS., SLP(C) No. 1404/2025 (and connected cases)

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