केरल SIR: सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति दर्ज करने की समय-सीमा बढ़ाने पर ECI से विचार को कहा, हटाए गए नाम प्रकाशित करने का निर्देश

Praveen Mishra

15 Jan 2026 3:23 PM IST

  • केरल SIR: सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति दर्ज करने की समय-सीमा बढ़ाने पर ECI से विचार को कहा, हटाए गए नाम प्रकाशित करने का निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निर्देश दिया कि केरल में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद जारी किए गए ड्राफ्ट मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनकी सूची को सार्वजनिक कार्यालयों और आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए। कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) से यह भी कहा कि वह नाम हटाए जाने के खिलाफ आपत्ति दर्ज करने की समय-सीमा बढ़ाने पर विचार करे।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ केरल में SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पिछली सुनवाई में चुनाव आयोग ने बताया था कि एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 4 दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर की गई थी, और कोर्ट के पिछले आदेश के बाद इसे फिर बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दिया गया।

    आज याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार लगभग 24 लाख नाम हटा दिए गए हैं। उनका कहना था कि लोगों को आपत्ति दर्ज करने का मौका तो दिया गया है, लेकिन जिनके नाम हटाए गए हैं उनकी सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे लोग यह भी नहीं जान पा रहे कि उनका नाम क्यों हटाया गया।

    हालांकि चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि कोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार ड्राफ्ट सूचियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर दी गई हैं, फिर भी कोर्ट ने आगे निर्देश जारी करते हुए कहा—

    “जिन व्यक्तियों के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं, यदि अभी तक प्रदर्शित नहीं किए गए हैं, तो उनकी सूची ग्राम पंचायत या गांवों में स्थित किसी अन्य सार्वजनिक कार्यालय में प्रदर्शित की जाए और वेबसाइट पर भी डाली जाए।”

    वकील ने यह भी बताया कि ड्राफ्ट सूची में कुछ लोगों को मृत घोषित किया गया है, जबकि कुछ को राज्य से बाहर बताया गया है।

    कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि चुनाव आयोग आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि बढ़ाने पर विचार करे, जिस पर आयोग के वकील ने सहमति जताई। इसके बाद कोर्ट ने निर्देश दिया—

    “जनता को हो रही कठिनाइयों को देखते हुए, चुनाव आयोग अंतिम तिथि बढ़ाने की उपयुक्तता पर विचार करे।”

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story