सुप्रीम कोर्ट ने ECI से कहा: केरल SIR की डेडलाइन और बढ़ाने पर विचार करें

Praveen Mishra

2 Dec 2025 4:01 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने ECI से कहा: केरल SIR की डेडलाइन और बढ़ाने पर विचार करें

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची के एन्‍यूमरेशन फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि और बढ़ाने की सिफारिश चुनाव आयोग को की। यह सुझाव राज्य में चल रही स्थानीय निकाय चुनाव प्रक्रिया को देखते हुए दिया गया।

    चीफ जस्टिस सुर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ को चुनाव आयोग ने बताया कि पहली डेडलाइन 4 दिसंबर थी, जिसे बढ़ाकर 11 दिसंबर किया गया है। केरल में स्थानीय निकाय चुनाव 9 और 11 दिसंबर को हो रहे हैं, जबकि मतगणना 13 दिसंबर को होगी।

    खंडपीठ ने कहा कि चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों को भी फॉर्म अपलोड करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। CJI ने ECI के वकील सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी से कहा,

    “आप डेडलाइन को और बढ़ाएं, ताकि जो छूट गए हैं उन्हें भी मौका मिले।”

    अदालत ने आदेश में कहा कि डेडलाइन बढ़ाने का अनुरोध “उचित और न्यायसंगत” है और ECI को इस पर विचार करना चाहिए। कोर्ट ने केरल सरकार को निर्देश दिया कि वह विस्तार की मांग का विस्तृत प्रतिनिधित्व ECI को भेज सकती है। चुनाव आयोग को यह प्रस्ताव दो दिनों के भीतर “निष्पक्ष और सहानुभूतिपूर्वक” निर्णय करने को कहा गया।

    यह सुनवाई केरल सरकार, IUML, KPCC अध्यक्ष सनी जोसेफ, CPI(M) सचिव गोविंदन मास्टर, CPI आदि की उन याचिकाओं पर हो रही थी, जिनमें स्थानीय निकाय चुनावों के चलते SIR को स्थगित करने की मांग की गई थी।

    स्थानीय चुनाव पर SIR का कोई असर नहीं : चुनाव आयोग

    राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIR प्रक्रिया के चलते स्थानीय चुनावों में कोई बाधा नहीं आ रही है, क्योंकि उन्हें आवंटित स्टाफ को SIR ड्यूटी से छूट दी गई है।

    सीनियर एडवोकेट द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि

    1.76 लाख स्टाफ स्थानीय चुनावों के लिए तैनात है

    25,468 कर्मचारी SIR प्रक्रिया के लिए हैं

    98.8% फॉर्म वितरित हो चुके हैं

    80% फॉर्म डिजिटलाइज हो चुके हैं

    ECI की ओर से सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह भी उपस्थित थे।

    IUML सचिव पी.के. कुन्हालिकुट्टी की ओर से अधिवक्ता हारिस बीरन ने बताया कि केरल में बड़ी NRI आबादी होने के कारण “विशेष समस्या” है।

    उन्होंने कहा कि

    35 लाख से अधिक केरलवासी NRI हैं

    अधिकांश खाड़ी देशों में रहते हैं

    BLOs ऑनलाइन आवेदन के बाद भी भौतिक सत्यापन के लिए आवेदक की घर पर मौजूदगी की मांग करते हैं

    यह मांग NRI के लिए अव्यावहारिक है, जिससे कई लोग मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं करा पाते। कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा भी प्रतिनिधित्व में उठाया जा सकता है।

    केरल सरकार पहले हाई कोर्ट गई थी, जिसने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए बताया कि इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है, इसलिए वहीं समाधान खोजा जाए।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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