DNA टेस्ट में पिता न होने पर भरण-पोषण नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने मां की अपील खारिज की

Praveen Mishra

22 April 2026 1:04 PM IST

  • DNA टेस्ट में पिता न होने पर भरण-पोषण नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने मां की अपील खारिज की

    सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने कहा है कि यदि डीएनए परीक्षण से यह साबित हो जाए कि कोई व्यक्ति बच्चे का जैविक पिता नहीं है, तो उसे भरण-पोषण देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, भले ही बच्चा वैवाहिक संबंध के दौरान जन्मा हो।

    जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने मां द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

    मामले का विवरण

    पक्षकारों की शादी 2016 में हुई थी। बाद में विवाद उत्पन्न होने पर महिला ने घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत अपने और बच्चे के लिए अंतरिम भरण-पोषण की मांग की।

    सुनवाई के दौरान पति की मांग पर डीएनए परीक्षण कराया गया, जिसमें यह सामने आया कि वह बच्चे का जैविक पिता नहीं है। इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने बच्चे के लिए भरण-पोषण देने से इनकार कर दिया, जिसे अपीलीय अदालत और हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा।

    सुप्रीम कोर्ट का रुख

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामान्यतः कानून के तहत विवाह के दौरान जन्मे बच्चे को वैध माना जाता है, लेकिन जब डीएनए टेस्ट जैसी वैज्ञानिक जांच से पितृत्व स्पष्ट रूप से खारिज हो जाए और उस रिपोर्ट को चुनौती भी न दी गई हो, तो ऐसे साक्ष्य को प्राथमिकता दी जाएगी।

    बच्चे के हितों पर निर्देश

    हालांकि, कोर्ट ने बच्चे के कल्याण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश दिया कि वह बच्चे की स्थिति—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण—का आकलन करे और आवश्यक होने पर सहायता सुनिश्चित करे।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण के मामलों में जैविक संबंध महत्वपूर्ण है और वैज्ञानिक साक्ष्य के सामने पारंपरिक कानूनी धारणा टिक नहीं सकती।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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